
MP पुलिस Custody में संदिग्ध की मौत, नोटबंदी के पुराने Note बदलने आए थे पांच लोग—अब न्यायिक जांच के आदेश
ग्वालियर में गुरुवार शाम थाना बिलौआ चौकी क्षेत्र में एक सनसनीखेज मामला सामने आया, जहां नोटबंदी के दौरान बंद हो चुके तीन लाख रुपये के पुराने नोट बदलने आए पांच संदिग्धों को पुलिस ने पकड़ लिया। पूछताछ के दौरान छीपटी गांव (दतिया) निवासी इकबाल खान (57) की तबीयत बिगड़ गई और पुलिस कस्टडी में ही उसकी मौत हो गई।

घटना कैसे हुई?
मुखबिर की सूचना पर जौरासी चौकी प्रभारी पूनम कटारे और उनकी टीम ने शाम 4:30 बजे इकबाल खान समेत पांच लोगों को रास्ते में दबोच लिया।
इन सभी को चौकी लाकर पुराने नोट बदलने और हवाला कारोबार के शक में सख्ती से पूछताछ की गई।
इकबाल पूछताछ के दबाव में घबरा गया, बेहोश होकर गिर गया। पुलिसकर्मी उसे फौरन डबरा के सरकारी अस्पताल ले गए, लेकिन उसकी मौत हो गई।
पुलिस की कार्रवाई और विवाद
- पुलिस ने उच्च अफसरों को घटना की सूचना तक नहीं दी।
- मृतक के परिजनों को चुपचाप शव देकर रवाना कर दिया गया।
- बाकी चार लोगों को धमकाया कि कोई पुलिस के खिलाफ बोलेगा तो जेल में पूरी ज़िंदगी बितानी पड़ सकती है।
- शुरुआती पूछताछ में यह पता चला है कि सभी किसी दलाल के भरोसे कमीशन पर नोट बदलने आए थे, लेकिन सौदा नहीं पटा तो वापसी कर रहे थे।
हवाला कारोबार का शक
इस मामले में हवाला के जरिए मोटा लेन-देन होने की भी संभावना जताई जा रही है।
पुलिस संदेह कर रही थी कि पांचों हवाला कारोबार में शामिल हैं और इसी वजह से उनसे सख्त पूछताछ की गई।

न्यायिक जांच के आदेश
ग्वालियर एसएसपी धरमवीर सिंह यादव ने बयान दिया है, “पुलिस कस्टडी में मौत का मामला है। पूरी घटना की न्यायिक जांच कराई जाएगी। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
यह घटना एमपी पुलिस की कार्यशैली, पूछताछ के तरीकों और कस्टडी में सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाती है।
अब मृतक इकबाल के मामले में न्यायिक जांच से सच सामने आने की उम्मीद है, साथ ही पुलिस की जवाबदेही तय हो सकेगी।
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