
Chhattisgarh में 14वें मंत्री के खिलाफ विरोध, High Court में दूसरी याचिका: कांग्रेस संचार प्रमुख ने जताई आपत्ति; BJP ने दिया हरियाणा फॉर्मूला का हवाला
रायपुर, 5 सितंबर 2025: छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की कैबिनेट विस्तार को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। हाल ही में मंत्रिमंडल में 14 मंत्रियों को शामिल करने के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में एक और जनहित याचिका दायर की गई है। इस याचिका में कांग्रेस के संचार प्रमुख ने कैबिनेट विस्तार को असंवैधानिक करार देते हुए इसकी वैधता पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस फैसले का बचाव करते हुए हरियाणा मॉडल का उदाहरण पेश किया है।

क्या है विवाद?
छत्तीसगढ़ विधानसभा में कुल 90 सीटें हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(1A) के अनुसार, मंत्रिपरिषद का आकार, जिसमें मुख्यमंत्री भी शामिल हैं, विधानसभा की कुल सीटों के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता। इस हिसाब से छत्तीसगढ़ में अधिकतम 13.5 मंत्रियों की नियुक्ति की जा सकती है, जिसे प्रभावी रूप से 13 मंत्रियों तक सीमित माना जाता है। हालांकि, साय सरकार ने 14 मंत्रियों को शामिल कर इस सीमा को पार कर लिया है। इस कदम को लेकर विपक्षी कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

कांग्रेस की आपत्ति: असंवैधानिक है फैसला
कांग्रेस के संचार प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस कैबिनेट विस्तार को असंवैधानिक करार दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बीजेपी नीत सरकार ने इस विस्तार के लिए केंद्र से आवश्यक मंजूरी ली है। बघेल ने कहा, “संविधान की सीमा स्पष्ट है। 90 सीटों वाली विधानसभा में 13 से अधिक मंत्री नहीं हो सकते। यह फैसला न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि जनता के साथ धोखा भी है।” कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी ने वरिष्ठ विधायकों को दरकिनार कर पहली बार के विधायकों को प्राथमिकता दी है, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है।
बीजेपी का जवाब: हरियाणा मॉडल का उदाहरण
बीजेपी ने इस विवाद का जवाब देते हुए हरियाणा मॉडल का हवाला दिया है। हरियाणा में भी 90 सीटों वाली विधानसभा में 14 मंत्रियों को शामिल किया गया है। बीजेपी का तर्क है कि यदि हरियाणा में यह व्यवस्था संभव है, तो छत्तीसगढ़ में भी इसे लागू किया जा सकता है। हालांकि, विपक्ष का कहना है कि हरियाणा मॉडल को लागू करने के लिए केंद्र सरकार की औपचारिक मंजूरी आवश्यक है, जिसके बारे में साय सरकार ने कोई जानकारी नहीं दी है।
हाई कोर्ट में सुनवाई
हाई कोर्ट में दायर इस दूसरी जनहित याचिका में कैबिनेट विस्तार को रद्द करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह कदम संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करता है। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई शुरू कर दी है, और जल्द ही इस पर फैसला आने की उम्मीद है। इससे पहले भी एक याचिका दायर की गई थी, जिसके बाद यह दूसरी याचिका इस मुद्दे को और गंभीर बनाती है।
क्या होगा अगला कदम?
कांग्रेस ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने का फैसला किया है। पार्टी का कहना है कि यदि कोर्ट ने इस विस्तार को असंवैधानिक ठहराया, तो बीजेपी को एक मंत्री को हटाना पड़ सकता है। वहीं, बीजेपी का कहना है कि वह अपने फैसले पर अडिग है और हरियाणा मॉडल के आधार पर इसे सही ठहराएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि अन्य राज्यों में भी संवैधानिक बहस को जन्म दे सकता है।
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