
Raipur में गणेशोत्सव समिति के खिलाफ FIR, अश्लील गानों और मूर्ति विकृति का आरोप
रायपुर शहर के सबसे चर्चित गणेश आयोजन समिति लाखेनगर गणेशोत्सव समिति (सिंधु एकता गणेश युवा एकता समिति) अब कानून के सामने फंसती नजर आ रही है। समिति संचालक के खिलाफ बजरंग दल की शिकायत पर आजाद नगर चौक प्राथमिकी दर्ज की गई है। समिति पर बजरंग दल ने भगवान गणेश के स्वरूप को विकृत करने और आयोजन स्थल पर अश्लील गाने बजाने के आरोप लगाए हैं।

घटनाक्रम की कड़ी, गुरुवार को रायपुर के लाखेनगर इलाके में गणेश पंडाल के सामने आइटम सांग बजाने और प्रतिमा को AI तकनीक स्वरूप में बनाए जाने को लेकर विवाद बढ़ गया था। यह विवाद तब और बढ़ गया जब बजरंग दल ने शिकायत की प्रतिमा को विकृत करने के साथ-साथ पंडाल में अश्लील गाने भी बजाए जा रहे हैं। इस घटना ने स्थानीय लोगों के बीच नाराजगी और गुस्से को बढ़ा दिया है।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब बजरंग दल के सदस्यों ने पंडाल में गणेश की स्थापना और आयोजन की शिकायत दर्ज की। उनका आरोप है कि गणेश प्रतिमा को पारंपरिक तरीके से बनाने के बजाय आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके उसे विकृत रूप में प्रस्तुत किया गया। इसके अलावा, पंडाल में बजाए जा रहे गानों में अश्लीलता पाई गई, जिससे स्थानीय लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है।
पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने रायपुर शहर में धार्मिक और सांस्कृतिक मर्यादाओं को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस तरह के आयोजनों से समाज में नकारात्मक संदेश जा रहा है।

बजरंग दल के प्रतिनिधियों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और मांग की है कि दोषी समिति सदस्यों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन को कड़े कदम उठाने चाहिए। दूसरी ओर, समिति के संचालकों का कहना है कि उनका इरादा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था, बल्कि एक नई और आधुनिक प्रस्तुति के माध्यम से गणेश उत्सव को और आकर्षक बनाना था।
इस घटना के बाद रायपुर पुलिस ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि वे इस तरह के विवादों को रोकने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी करें। यह घटना न केवल धार्मिक भावनाओं से जुड़ी है, बल्कि यह सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं की रक्षा को लेकर भी एक गंभीर सवाल खड़ा करती है।
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