
Uttar Bharat में प्राकृतिक आपदा: बाढ़ और भूस्खलन से 90 की मौत, लाखों प्रभावित
बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं
- लगातार और अत्यधिक मानसूनी बारिश पिछले कुछ हफ्तों से जारी है, जिससे नदी-नदियों में पानी खतरे के स्तर से ऊपर चला गया है.
- हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी क्षेत्रों में बादल फटने और भूस्खलन की घटनाएं बार-बार सामने आई हैं.
- पंजाब में खेती और गांवों में बाढ़ का भारी नुकसान हुआ—केवल पंजाब में 29 से 37 मौतें और करीब 250,000 से ज्यादा लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं.

जनधन की हानि व राहत कार्य
- हजारों गांव पानी में डूबे हैं, घरों व सड़कों को नुकसान हुआ है, फसलें बर्बाद हुई हैं.
- सेना, वायुसेना, NDRF, BSF और स्थानीय प्रशासन संयुक्त राहत और बचाव कार्यों में जुटे हैं.
- दिल्ली समेत NCR के कई हिस्सों में यमुना और अन्य नदियों से हजारों नागरिकों का सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरण हुआ है.
विशेषज्ञों की राय: जलवायु परिवर्तन और संरचनात्मक कमी
विशेषज्ञ इस भीषण आपदा के पीछे जलवायु परिवर्तन और स्थानीय स्तर पर नक्शानवीसी, अवैज्ञानिक निर्माण, अतिक्रमण जैसी संरचनात्मक कमियों को बड़ा कारण मानते हैं.
कमजोर जलनिकासी, बिना प्लानिंग की शहरीकरण और पर्यावरणीय नुकसान ने बाढ़ व आपदा का जोखिम बढ़ाया है.

आगे की चुनौती
- मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए और भारी बारिश के पूर्वानुमान के साथ “रेड अलर्ट” जारी किया है.
- ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में राहत, पुनर्वास एवं स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी आवश्यकता है.
- भारत के इन राज्यों में बाढ़ और भूस्खलन की आपदा ने सरकारी तंत्र, राहत दलों और आम जनता के सामने गंभीर चुनौती पैदा कर दी है; राहत एवं पुनर्वास कार्य तेज़ी से चल रहे हैं, वहीं जलवायु परिवर्तन और परियोजनात्मक सुधार की मांगें भी उठ रही हैं
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