
16 हजार NHM कर्मियों का सामूहिक इस्तीफा, मितानिनों ने सड़क पर उतरकर किया चक्काजाम
संविलियन और वेतन वृद्धि की मांग तेज, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप

छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के 16 हजार से ज्यादा कर्मचारियों ने गुरुवार को सामूहिक इस्तीफा देकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि वे जब तक उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन वापस नहीं लेंगे।
कर्मचारियों ने सरकार पर वादाखिलाफी के आरोप लगाते हुए कहा कि वे संविलियन, ग्रेड पे में वृद्धि और 27% वेतन बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। वहीं मितानिनों ने सड़क पर उतरकर जाम और धरना प्रदर्शन किया, जिसके चलते कई जगहों पर यातायात 3 घंटे तक पूरी तरह बाधित रहा।
🔴 आंदोलन की पृष्ठभूमि
- एनएचएम के कर्मचारी 18 अगस्त से लगातार हड़ताल पर हैं।
- बुधवार को सरकार ने आंदोलनरत 25 कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी।
- इसे लेकर स्वास्थ्य कर्मियों में नाराजगी फैली और गुरुवार को 16 हजार से अधिक कर्मियों ने एक साथ अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
🚨 स्वास्थ्य सेवाएं ठप
- लगातार हड़ताल और अब सामूहिक इस्तीफे से ग्रामीण क्षेत्रों और राजधानी रायपुर तक के स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज बंद हो गया है।
- मरीजों को इलाज व दवा नहीं मिल पा रही है।
- आपातकालीन सेवाओं पर भी असर देखा जाने लगा है।
- गर्भवती महिलाओं और दूर-दराज गांव से आने वाले मरीजों को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है।
🙎♀️ मितानिनों का आक्रोश – सड़कों पर बैठकर किया प्रदर्शन
- गुरुवार को मितानिनों ने गरियाबंद से रायपुर की ओर मार्च किया और कहा कि उन्हें भी सरकारी कर्मचारी का दर्जा मिले, साथ ही मानदेय बढ़ाया जाए।
- रायपुर पहुंचने से पहले पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रोक दिया।
- आक्रोशित महिलाएं सड़क पर ही बैठ गईं और धरना प्रदर्शन करने लगीं।
- गरियाबंद के तिरंगा चौक और पांडुका मुख्य मार्ग पर बैठने से नेशनल हाईवे पर 3 घंटे से ज्यादा का जाम लग गया।

✋ कर्मचारियों की मांगें
- संविलियन (स्थायी नियुक्ति में शामिल करना)
- ग्रेड पे में वृद्धि
- 27% वेतन वृद्धि लागू करना
- मितानिनों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा
- मानदेय और भत्तों में इजाफा
🏛️ सरकार की चुनौती
- सरकार द्वारा अब तक केवल वार्ता की कोशिश हुई, लेकिन कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया।
- 25 कर्मचारियों की सेवा समाप्ति से हालात और बिगड़ गए हैं।
- स्वास्थ्य विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था की कोशिश की है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की कमी से मरीजों को राहत नहीं मिल पा रही है।
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