
नक्सलियों की क्रूरता: Bijapur में शिक्षादूत की हत्या, गांव का स्कूल सूना
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सलियों ने एक बार फिर अपनी क्रूरता दिखाई। 28 अगस्त को नेंड्रा गांव के शिक्षक कल्लू ताती की बेरहमी से हत्या कर दी गई। नक्सलियों ने रास्ते में उन्हें पकड़ा, गला रेतकर मार डाला और शव को कीचड़ में गाड़ दिया। इस वारदात ने पूरे गांव को झकझोर दिया है। स्कूल में अब सन्नाटा पसरा है, और मासूम बच्चे अपने “सर” के लौटने का इंतजार कर रहे हैं।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
कल्लू ताती के शव पर धारदार हथियारों के गहरे निशान थे। लहूलुहान शव देखकर उनके माता-पिता और बहन का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता मंगल ताती ने कहा, “मैंने बेटे को पढ़ा-लिखाकर शिक्षक बनाया, लेकिन नक्सलियों ने उसे मुखबिर बताकर मार डाला।” बहन मनीषा ने बताया कि भाई के हाथ-पांव बांधकर जानवरों की तरह कत्ल किया गया। परिवार का कहना है कि कल्लू गांव के बच्चों को पढ़ाने के लिए दिन-रात मेहनत करते थे।

बच्चों का टूटा सहारा
नेंड्रा गांव का स्कूल अब वीरान है। लकड़ी और बांस से बना यह अस्थायी स्कूल कभी 15-20 बच्चों की हंसी-ठिठोली से गूंजता था। बच्चे मिट्टी पर बैठकर पढ़ते थे, और ब्लैकबोर्ड पर आज भी कल्लू की आखिरी क्लास के निशान—1 से 100 की गिनती और ABCD—मौजूद हैं। अब बच्चे बारी-बारी से खुद पढ़ाने की कोशिश करते हैं, लेकिन उन्हें नहीं पता कि उनके शिक्षक अब कभी नहीं लौटेंगे।

10 शिक्षादूतों की हत्या
नक्सलियों ने बीजापुर में 5, सुकमा में 3 और नारायणपुर में 2—कुल 10 शिक्षादूतों की हत्या कर दी है। ये शिक्षक आदिवासी अंचलों में शिक्षा की अलख जगाने का काम कर रहे थे, लेकिन नक्सली उन्हें बंदूक और कुल्हाड़ी से मौत के घाट उतार रहे हैं। इन हत्याओं ने शिक्षा के प्रति नक्सलियों की नफरत को उजागर किया है।
शिक्षादूत योजना और चुनौतियां
छत्तीसगढ़ सरकार ने दूरदराज के इलाकों में शिक्षा पहुंचाने के लिए शिक्षादूत योजना शुरू की है। बीजापुर में 333 और सुकमा में 107 शिक्षादूत 10 हजार रुपये के मानदेय पर काम कर रहे हैं। लेकिन शिक्षादूतों का कहना है कि वेतन में महीनों की देरी, अफसरशाही का रवैया और जान का जोखिम उनकी सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। इसके बावजूद, सरकार उन्हें न तो शहीद का दर्जा देती है और न ही उनके परिवारों को पर्याप्त मुआवजा।
शिक्षादूतों की मांग
मानदेय को बढ़ाकर 25 हजार रुपये किया जाए।
मृत शिक्षादूतों के परिजनों को 50 लाख रुपये मुआवजा और अनुकंपा नियुक्ति दी जाए।
डीएलएड और बीएड योग्यता वाले शिक्षादूतों को नियमित भर्ती में प्राथमिकता मिले।
जिनके पास यह योग्यता नहीं है, उन्हें इसे हासिल करने के लिए 3 साल का समय दिया जाए।
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