
Raipur में गणेश पंडाल में Item सॉन्ग पर बवाल
रायपुर, छत्तीसगढ़ की राजधानी, में गणेश चतुर्थी के दौरान एक गणेश पंडाल में आइटम सॉन्ग बजाए जाने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। यह घटना शहर के एक प्रमुख गणेश पंडाल में हुई, जहां आयोजकों द्वारा भक्ति संगीत के बजाय बॉलीवुड के आइटम सॉन्ग बजाने की वजह से स्थानीय हिंदू संगठनों ने कड़ा विरोध जताया। इस विवाद ने इतना तूल पकड़ा कि पंडाल में भगवान गणेश की मूर्ति को कपड़े से ढक दिया गया, स्टेज की लाइट बंद करवाई गई और हिंदू संगठनों ने भजन-कीर्तन शुरू कर दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को भारी संख्या में तैनात करना पड़ा, जिसमें 12 थानों के थाना प्रभारी (TI) और अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे।
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क्या थी घटना?
जानकारी के अनुसार, रायपुर के एक प्रमुख गणेश पंडाल में गणेश चतुर्थी के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस दौरान आयोजकों ने भक्ति भजनों और पारंपरिक गीतों के बजाय बॉलीवुड के कुछ आपत्तिजनक आइटम सॉन्ग्स बजाने शुरू कर दिए। यह बात स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों को नागवार गुजरी। उनका कहना था कि गणेश चतुर्थी जैसे पवित्र पर्व पर इस तरह के गीतों का बजाया जाना धार्मिक भावनाओं का अपमान है।
हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने तुरंत आयोजकों से गाने बंद करने की मांग की, लेकिन जब उनकी बात नहीं मानी गई, तो विरोध और तेज हो गया। कार्यकर्ताओं ने पंडाल में प्रवेश कर स्टेज की लाइट बंद करवा दी और भगवान गणेश की मूर्ति को सम्मान के साथ कपड़े से ढक दिया, ताकि माहौल को और अधिक अपमानजनक होने से रोका जा सके। इसके बाद, हिंदू संगठनों ने पंडाल में भजन और कीर्तन शुरू कर दिए, जो लगभग 4 घंटे तक चला।
हिंदू संगठनों का गुस्सा
विरोध करने वाले हिंदू संगठनों का कहना था कि गणेश चतुर्थी एक धार्मिक और आध्यात्मिक पर्व है, जिसमें भक्ति और श्रद्धा का माहौल होना चाहिए। एक कार्यकर्ता ने कहा, “हम गणपति बप्पा की पूजा करने आए हैं, न कि डांस और आइटम सॉन्ग्स सुनने। यह हमारी धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। आयोजकों को चाहिए कि वे इस तरह के आयोजनों में भक्ति और संस्कृति को बढ़ावा दें।” कार्यकर्ताओं ने आयोजकों से माफी की मांग की और भविष्य में ऐसी गलतियां न दोहराने की चेतावनी दी।

पुलिस का हस्तक्षेप
विवाद बढ़ता देख स्थानीय पुलिस प्रशासन को तुरंत मौके पर पहुंचना पड़ा। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए रायपुर के 12 थानों से थाना प्रभारी (TI) और अन्य पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। पुलिस ने आयोजकों और हिंदू संगठनों के बीच मध्यस्थता करने की कोशिश की। कई घंटों की बातचीत और समझाइश के बाद स्थिति को शांत किया गया। पुलिस ने आयोजकों को निर्देश दिए कि वे आगे से धार्मिक आयोजनों में केवल भक्ति संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम ही आयोजित करें।
आयोजकों की सफाई
पंडाल के आयोजकों ने इस घटना पर सफाई देते हुए कहा कि उनका इरादा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं था। उनका कहना था कि सांस्कृतिक कार्यक्रम में युवाओं को आकर्षित करने के लिए कुछ लोकप्रिय गाने बजाए गए थे, लेकिन उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि यह धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकता है। आयोजकों ने माफी मांगी और भविष्य में ऐसी गलतियां न दोहराने का वादा किया।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
इस घटना ने स्थानीय लोगों के बीच भी खासी चर्चा बटोरी। कई लोगों ने हिंदू संगठनों के विरोध का समर्थन किया, जबकि कुछ का मानना था कि मामला इतना तूल न पकड़ता तो बेहतर होता। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “गणेश चतुर्थी का पर्व हमारी संस्कृति और आस्था का प्रतीक है। आयोजकों को चाहिए कि वे इस तरह के आयोजनों में सावधानी बरतें।”
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