
Raipur: 5 दिन तक इलाज के लिए भटके भाई-बहन, मेकाहारा अस्पताल में हंगामा
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में बुधवार रात एक मरीज और उसके परिजन के आक्रोश ने सबका ध्यान खींचा। खरोरा निवासी राजू रात्रे अपनी 27 वर्षीय बहन गायत्री बंजारे को लेकर 26 अगस्त को अस्पताल पहुंचे थे। गायत्री को गले में दर्द की शिकायत थी और वह पांच दिनों से कुछ खा-पी नहीं पा रही थी। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही के कारण इलाज में देरी हुई, जिससे स्थिति बिगड़ गई और हंगामे की नौबत आ गई।

पांच दिन तक इलाज के लिए इंतजार
परिजनों का कहना है कि गायत्री को 26 अगस्त को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन लगातार जांच के बावजूद उनका इलाज शुरू नहीं हुआ। 31 अगस्त को एंडोस्कोपी की तारीख दी गई, लेकिन डॉक्टर ने यह कहकर मना कर दिया कि मरीज ने खाना खाया है। परिवार ने दावा किया कि गायत्री ने कई दिनों से कुछ भी नहीं खाया था। इसके बाद चार दिन तक मरीज अस्पताल के बरामदे में इलाज के इंतजार में भटकती रही।

आक्रोश में भाई ने दी आत्मदाह की धमकी
3 सितंबर की शाम को गायत्री की हालत बिगड़ने पर उनके भाई राजू रात्रे का गुस्सा फट पड़ा। उन्होंने बहन को जलाने और खुद आत्मदाह करने की चेतावनी दी, जिसके बाद अस्पताल में हंगामा शुरू हो गया। मौके पर मौजूद अन्य मरीजों और परिजनों ने भी अस्पताल प्रशासन पर इलाज में देरी और लापरवाही का आरोप लगाया। हंगामे की सूचना पर अस्पताल का माहौल तनावपूर्ण हो गया।

डॉक्टर और परिजनों में तीखी नोकझोंक
हंगामे की सूचना पर सीनियर डॉक्टर रश्मि अग्रवाल मौके पर पहुंचीं, जहां उनके और परिजनों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। डॉक्टर ने गायत्री को मानसिक रूप से अस्थिर बताने की कोशिश की, जिससे परिजन और भड़क गए। बाद में मरीज की मेडिकल रिपोर्ट देखने पर एंडोस्कोपी का जिक्र मिला, जिसके बाद इलाज शुरू हुआ।
अस्पताल अधीक्षक का बयान
मेकाहारा अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने मामले पर सफाई देते हुए कहा कि परिजनों की आत्मदाह की धमकी और तनावपूर्ण स्थिति के कारण डॉक्टर ने गुस्से में बयान दे दिया होगा। उन्होंने स्वीकार किया कि कई मरीजों ने इलाज में देरी की शिकायत की है। डॉ. सोनकर ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
सरकारी अस्पतालों की लचर व्यवस्था उजागर
यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है। मरीजों को समय पर इलाज न मिलना और प्रशासनिक लापरवाही मरीजों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है। गायत्री के मामले ने न केवल मेकाहारा अस्पताल, बल्कि पूरे सिस्टम की खामियों को उजागर किया है। स्थानीय लोगों और मरीजों ने मांग की है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
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