
तमिलनाडु में AMMK ने BJP गठबंधन छोड़ा, लोकसभा में AMMK के 3 सदस्य
तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा सियासी भूचाल आया है क्योंकि अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (AMMK) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से अपने नाता तोड़ने का ऐलान कर दिया है। यह कदम 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जो तमिलनाडु के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। AMMK के प्रमुख टीटीवी दिनाकरन ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पार्टी अब NDA का हिस्सा नहीं रहेगी

दिनाकरन ने कहा कि AIADMK के साथ गठबंधन को लेकर कई धोखे और झूठ सामने आए, जिससे पार्टी ने यह फैसला किया। उन्होंने इस बात को भी स्पष्ट किया कि पंचायत चुनावों और आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर नई राजनीतिक रणनीति दिसंबर में घोषित की जाएगी। इस दौरान AMMK अन्य राजनीतिक पार्टियों से गठबंधन कर सकती है, जिसमें द्रमुक के साथ सहयोग की भी संभावना जताई जा रही है। उन्होंने कहा, “हम मूर्ख नहीं हैं कि दूसरों को अपने कंधों पर ढोते रहें। हमने कई महीनों तक इंतजार किया, लेकिन अब हमें कुछ होता नहीं दिख रहा।”
इसके अलावा, तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और AIADMK के बड़े नेता ओ पन्नीरसेल्वम (OPS) भी पहले ही BJP गठबंधन से दूरी बना चुके हैं। पन्नीरसेल्वम का यह फैसला BJP के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाल के दौरे के दौरान उनसे मिलने का मौका न मिलने और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा AIADMK के विभिन्न गुटों को एकजुट करने की कोशिशें असफल रहने के बाद आया है।
लोकसभा में AMMK के कुल तीन सदस्य हैं जो तमिलनाडु से चुने गए हैं। 2024 के लोकसभा चुनावों में AMMK ने NDA के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन अब गठबंधन से अलग होकर पार्टी अपनी राजनीतिक पहचान फिर से बनाना चाहेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि AMMK का NDA से अलग होना द्रमुक (DMK) के लिए बढ़ावा हो सकता है, क्योंकि इससे BJP और उसके सहयोगी दलों की ताकत कमजोर पड़ेगी।
तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों में यह बदलाव निर्णायक भूमिका निभा सकता है, क्योंकि AMMK की भूमिका एक तरह से मतदाताओं की धुरी बन सकती है जो चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण होगी। इसी के साथ द्रमुक और AIADMK के बीच सियासी मुकाबला और तीखा होने की संभावना बढ़ी है।

समय बताएगा कि AMMK का यह फैसला तमिलनाडु की राजनीति में किस प्रकार का प्रभाव डालता है, लेकिन फिलहाल यह स्पष्ट है कि बीजेपी और इसके गठबंधन के लिए यह बड़ा झटका है। दोनों पार्टियों के बीच सियासी समीकरणों में उत्तर-चढ़ाव आने वाला है, जो आगामी चुनावों को और भी रोचक बनाएगा।
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