
Mahasamund और गरियाबंद में चक्काजाम: मितानिनों ने अपनी मांगों को लेकर रोके रास्ते, रायपुर में भी हड़ताल का असर
रायपुर, छत्तीसगढ़। 4 सितंबर 2025 को छत्तीसगढ़ के महासमुंद और गरियाबंद जिलों में आंदोलनकारी मितानिनों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर चक्काजाम कर दिया, जिससे यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) कर्मियों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की हड़ताल के चलते प्रदेशभर में कई प्रमुख मार्गों पर जाम की स्थिति बनी हुई है। खासकर महासमुंद टोल, बेरला रोड और गरियाबंद रोड पर भारी जाम देखा गया, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

हड़ताल और मांगों का विवरण
पिछले महीने की 7 तारीख से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अपनी दो सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। उनकी प्रमुख मांगों में नियमितीकरण, वेतन वृद्धि, और बेहतर कार्यस्थितियों की मांग शामिल है। वहीं, एनएचएम कर्मियों ने भी दस सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल शुरू की है, जिसमें नौकरी की स्थायीकरण, पेंशन लाभ, और अन्य सुविधाओं की मांग शामिल है। इन मांगों को लेकर आंदोलनकारी रायपुर में मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने की योजना बना रहे थे।
आंदोलनकारी मितानिनों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने नया रायपुर के तूता में धरना देने का प्लान बनाया था, लेकिन पुलिस ने उन्हें वहां पहुंचने से पहले ही रोक दिया। इस कार्रवाई के बाद आंदोलनकारियों ने सड़कों पर उतरकर चक्काजाम कर दिया, जिससे कई क्षेत्रों में यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
महासमुंद और गरियाबंद में स्थिति
महासमुंद और गरियाबंद में मितानिनों के आंदोलन ने सड़कों पर जाम की स्थिति पैदा कर दी। महासमुंद टोल पर सैकड़ों आंदोलनकारी सड़क पर बैठ गए, जिससे रायपुर से आने-जाने वाले वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। इसी तरह, गरियाबंद रोड और बेरला रोड पर भी जाम की स्थिति बनी रही। स्थानीय लोगों और यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा, जिससे उनकी दिनचर्या प्रभावित हुई।
रायपुर में आंदोलन का असर
हालांकि रायपुर शहर की मितानिनों ने इस आंदोलन में सक्रिय रूप से हिस्सा नहीं लिया, लेकिन ग्रामीण और आसपास के क्षेत्रों से आए आंदोलनकारियों ने शहर के प्रवेश मार्गों को प्रभावित किया। रायपुर आने वाली प्रमुख सड़कों पर जाम के कारण कार्यालय जाने वाले कर्मचारी, स्कूल-कॉलेज के छात्र, और सामान्य नागरिक परेशान हुए। कई लोगों ने बताया कि उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने में घंटों की देरी हुई।

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। पुलिस ने आंदोलनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन उनकी मांगों पर कोई ठोस आश्वासन न मिलने के कारण प्रदर्शनकारी सड़कों से हटने को तैयार नहीं हैं। पुलिस ने वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की सलाह दी है और यातायात को डायवर्ट करने के लिए ट्रैफिक पुलिस को अतिरिक्त रूप से तैनात किया गया है।
सरकार का रुख
सरकार ने अभी तक इन मांगों पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है, जिसके कारण आंदोलनकारी और आक्रोशित हैं। कुछ नेताओं और संगठनों ने सरकार से तत्काल वार्ता शुरू करने की मांग की है ताकि स्थिति को और बिगड़ने से रोका जा सके।
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