
Gariyaband में तृतीय श्रेणी कर्मचारी को तीन राजपत्रित अधिकारियों के पदों पर नियुक्ति का विवाद
गरियाबंद जिले में सरकार के नियमों की अवहेलना करते हुए एक तृतीय वर्ग कर्मचारी टीएस नागेश को राजपत्रित अधिकारियों के तीन बड़े पद—जनपद सीईओ, जिला पंचायत उप संचालक, और जिला अंकेक्षण अधिकारी—की जिम्मेदारी एक साथ सौंप दी गई है। यह पद सामान्यतः केवल राजपत्रित अधिकारियों को ही सौंपे जाते हैं।

नियमों की अवहेलना और नियुक्ति
सरकारी निर्देशों के अनुसार, अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों में इन पदों पर हमेशा राजपत्रित अधिकारियों का ही होना अनिवार्य है। हालांकि, तीन साल पूर्व नियमों को दरकिनार करते हुए नागेश को देवभोग जनपद सीईओ नियुक्त किया गया। उसके बाद उन्हें बहरहाल जिला अंकेक्षण अधिकारी और जिला पंचायत उप संचालक जैसे पद भी तैनात किए गए। अन्य योग्य अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद यह काम किया गया।
शिकायत और जांच
इस नियुक्ति पर जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने भ्रष्टाचार और पदों पर अयोग्य कर्मचारियों को बैठाने की शिकायत की। जांच के बावजूद प्रशासन ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। संजय नेताम का कहना है कि नागेश जनप्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों की बातों को नजरअंदाज करता है और विकास कार्यों में बाधा डालता है।
भ्रष्टाचार और मनमानी
नागेश के पदों पर रहते हुए कई भ्रष्टाचार की घटनाएं प्रकाश में आई हैं। पंचायतों में ऑडिट के नाम पर सरपंच और सचिवों से रुपए वसूले जाते हैं, जिनके मना करने पर रिपोर्ट में गड़बड़ी दिखाने की धमकी दी जाती है। साथ ही, पंचायत सचिवों के तबादलों में मनमानी की गई और भ्रष्टाचार के आरोप लगे।

प्रशासन की प्रतिक्रिया
गरियाबंद कलेक्टर बीएस उइके ने बताया कि उन्हें इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है और जिला पंचायत सीईओ से संपर्क करने को कहा। जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर ने हाल ही में सीईओ के हटने के बाद नागेश को प्रभारी बनाया गया है और जल्द ही पदों के लिए योग्य अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी।
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