
जलाशय टूटने से Bastar में मची तबाही: 7 की मृत्यु, 3 Lakh बाढ़ से प्रभावित
बलरामपुर जिले में मंगलवार की रात को एक भीषण घटना घटी, जब एक जलाशय टूटने से नदी के आसपास के क्षेत्रों में भयंकर बाढ़ आ गई। इस हादसे में अब तक 7 लोगों की मृत्यु की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 3 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। इस आपदा ने स्थानीय लोगों के जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है, खासकर उन परिवारों को, जिनके पास अपना घर और आजीविका खोने का जोखिम है।

घटना की शुरुआत और प्रभाव
जानकारी के अनुसार, मंगलवार रात को अचानक जलाशय की दीवार टूट गई, जिससे नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। बाढ़ के तेज बहाव ने आसपास के गांवों और एक बड़े परिवार के चहल-पहल वाले क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में कुल सात लोग बह गए, जिनमें से तीन की लाश बरामद की जा चुकी है, जबकि चार की तलाश जारी है। बाढ़ के कारण सैकड़ों घरों को नुकसान पहुंचा है, और कई परिवार सड़कों पर आश्रय लेने को मजबूर हैं।
प्रशासनिक और राहत कार्य
इस भीषण आपदा की सूचना मिलते ही बलरामपुर कलेक्टर राजेंद्र कटारा, पुलिस अधीक्षक, बैंकर्स और प्रशासनिक अधिकारियों-कर्मचारियों ने तत्काल मोर्चा संभाला। उन्होंने प्रभावित इलाकों का दौरा किया और बचाव कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए। स्थानीय पुलिस और प्रशासन के साथ-साथ एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल) की टीम भी मौके पर पहुंच गई है। बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में गंभीर हालात को देखते हुए राहत सामग्री वितरित की जा रही है, और बेघर हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

गायब लोगों की तलाश
बाढ़ के बाद कई लोग लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन के अनुसार, अभी तक दर्जनों लोगों की तलाश जारी है, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की घटना पहले कभी नहीं हुई, और वे प्रशासन से और तेजी से राहत कार्य की मांग कर रहे हैं।
जलाशय की मरम्मत और जांच
जानकारी के अनुसार, यह जलाशय पिछले 10-12 सालों से मरम्मत के अभाव में था, जिसके कारण यह हादसा हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि जलाशय की नियमित जांच और रखरखाव न होने से यह स्थिति पैदा हुई। अब प्रशासन ने इसकी मरम्मत और मजबूती के लिए विशेषज्ञों की एक टीम तैनात की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटना से बचा जा सके।

प्रभावित गांव और स्थिति
बलरामपुर जिले के ग्राम पंचायत विश्रामनगर और इसके आसपास के गांवों में इस बाढ़ का सबसे अधिक असर देखा गया। 1980-81 में हुई भीषण बाढ़ की यादें ताजा हो गई हैं, जब इस क्षेत्र में भारी तबाही मची थी। वर्तमान में स्थिति नियंत्रण में लाने के लिए प्रशासन दिन-रात मेहनत कर रहा है, लेकिन राहत कार्यों में और तेजी की आवश्यकता है।
इस आपदा ने एक बार फिर जलाशयों और बांधों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि सरकार इस घटना की गहन जांच करे और प्रभावित परिवारों को मुआवजा व पुनर्वास की सुविधा प्रदान करे। प्रशासन का दावा है कि वे हर संभव मदद के लिए प्रतिबद्ध हैं और जल्द ही स्थिति सामान्य करने का प्रयास करेंगे।
👉 हमारे WhatsApp channel से जुड़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें👇👇
https://whatsapp.com/channel/0029VbALQC677qVNwdR5Le3V



