
Bijapur डिप्टी कलेक्टर रेप केस: पीड़िता ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र, गिरफ्तारी में देरी और दबाव का आरोप
रायपुर/बालोद: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में तैनात डिप्टी कलेक्टर दिलीप कुमार उइके के खिलाफ रेप, आर्थिक शोषण और जबरन गर्भपात के गंभीर आरोपों ने राज्य में हड़कंप मचा दिया है। पीड़िता, जो छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (सीएएफ) की एक महिला आरक्षक है, ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है। पीड़िता ने आरोप लगाया कि डौंडी थाने में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज होने के बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी में देरी हो रही है और उसे बीमारी की छुट्टी देकर फरार होने का मौका दे दिया गया।

पीड़िता की मांग: सिविल सेवा नियमों के तहत सख्त कार्रवाई
पीड़िता ने अपने पत्र में मांग की है कि डिप्टी कलेक्टर के खिलाफ सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत तत्काल और कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर आरोपों के बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी में देरी और प्रशासनिक ढिलाई से उनके साथ न्याय नहीं हो रहा है। पीड़िता ने यह भी दावा किया कि उन्हें मामले को दबाने के लिए दबाव डाला जा रहा है। पत्र में उन्होंने लिखा, “आरोपी एक वरिष्ठ अधिकारी है, जिसके कारण पुलिस और प्रशासन उस पर कार्रवाई करने में हिचक रहा है।“

पुलिस की कार्रवाई: तलाश जारी, जल्द गिरफ्तारी का दावा
डौंडी थाना प्रभारी उमा ठाकुर ने बताया कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया है और आरोपी की तलाश में छापेमारी की जा रही है। उन्होंने कहा, “हमने कई स्थानों पर दबिश दी है और जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।” हालांकि, पीड़िता का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई में देरी और लापरवाही के कारण आरोपी अब तक फरार है।
मामला और पृष्ठभूमि
जानकारी के अनुसार, पीड़िता और डिप्टी कलेक्टर दिलीप कुमार उइके के बीच पहले से परिचय था। पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर उनके साथ शारीरिक संबंध बनाए और बाद में आर्थिक शोषण किया। इसके अलावा, जबरन गर्भपात कराने का भी गंभीर आरोप लगाया गया है। मामला तब और तूल पकड़ा जब पीड़िता ने डौंडी थाने में शिकायत दर्ज की, लेकिन कार्रवाई में देरी के कारण उन्होंने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की।
सामाजिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
इस मामले ने छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। सामाजिक संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने पीड़िता के समर्थन में आवाज बुलंद की है और मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो। साथ ही, यह भी मांग उठ रही है कि वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके।
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