
NHM कर्मचारियों का आंदोलन तेज, नियमितीकरण की मांग को लेकर सरकार से आर-पार की लड़ाई
महासमुंद, 01 सितंबर 2025: छत्तीसगढ़ में नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत अस्थाई कर्मचारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। नियमितीकरण, बेहतर वेतन, और कार्यस्थल पर सुविधाओं की मांग को लेकर यह कर्मचारी पिछले कई दिनों से हड़ताल पर हैं। सरकार ने इन कर्मचारियों को अल्टीमेटम के साथ नोटिस जारी किया है, लेकिन कर्मचारी इस बार आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं।

हड़ताल और सरकार का रुख
एनएचएम कर्मचारियों का आंदोलन पूरे प्रदेश में जोर पकड़ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नियमितीकरण की मांग को लेकर ये कर्मचारी लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। दूसरी ओर, सरकार ने ‘नो वर्क, नो पेमेंट’ का आदेश जारी किया है, जिसके तहत हड़ताल पर गए कर्मचारियों को वेतन न देने की बात कही गई है। कई जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएमएचओ) ने हड़ताली कर्मचारियों को नोटिस जारी कर काम पर लौटने का अल्टीमेटम दिया है, साथ ही नौकरी से बर्खास्त करने की चेतावनी भी दी है।
कर्मचारियों की मांगें
एनएचएम कर्मचारी लंबे समय से नियमितीकरण, वेतन वृद्धि, और बेहतर कार्यस्थल सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अस्थाई नौकरी के कारण उनकी नौकरी की सुरक्षा हमेशा खतरे में रहती है। इसके अलावा, कोविड-19 महामारी के दौरान इन कर्मचारियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर काम किया, लेकिन इसके बावजूद उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया। कर्मचारियों का कहना है कि वे अपनी मांगों के लिए तब तक आंदोलन जारी रखेंगे, जब तक सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं करती।

प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
हड़ताल के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में एनएचएम के तहत संचालित स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण अस्पतालों में स्टाफ की कमी हो रही है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने सरकार और कर्मचारियों से जल्द से जल्द इस मुद्दे का समाधान करने की मांग की है।
कर्मचारियों का संकल्प
हड़ताली कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि वे सरकार के दबाव में नहीं झुकेंगे। कर्मचारी संगठनों के नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं। उन्होंने सरकार से तत्काल वार्ता शुरू करने और उनकी मांगों पर विचार करने की अपील की है। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगें न केवल उनके हित में हैं, बल्कि यह बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी जरूरी हैं।
सरकार की चुनौती
सरकार के सामने इस आंदोलन को सुलझाने की बड़ी चुनौती है। एक ओर जहां स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रखना सरकार की प्राथमिकता है, वहीं कर्मचारियों की मांगों को नजरअंदाज करना भी संभव नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुद्दे का समाधान केवल आपसी बातचीत और सहमति से ही निकाला जा सकता है।
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