
Balrampur:क्लास में बातचीत करने पर तीन छात्राओं की डंडे से पिटाई, सहायक शिक्षिका निलंबित
बलरामपुर, 31 अगस्त 2025: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के राजपुर ब्लॉक में स्थित धमधमियापारा प्राइमरी स्कूल में एक शर्मनाक घटना सामने आई है। कक्षा पांचवीं में पढ़ाई के दौरान आपस में बातचीत करने की वजह से सहायक शिक्षिका ज्योति तिर्की ने तीन छात्राओं की बांस की छड़ी से बेरहमी से पिटाई कर दी। इस घटना में एक छात्रा के घुटने में गंभीर सूजन आ गई, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने शिक्षिका को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

घटना का विवरण
28 अगस्त को धमधमियापारा प्राइमरी स्कूल में यह घटना घटी। जानकारी के अनुसार, कक्षा पांचवीं में पढ़ाई के दौरान तीन छात्राएं आपस में बातचीत कर रही थीं। इससे नाराज होकर सहायक शिक्षिका ज्योति तिर्की ने लकड़ी की छड़ी (रूल) से तीनों छात्राओं की पिटाई शुरू कर दी। पिटाई इतनी जोरदार थी कि एक छात्रा, मुनिका कोरवा (11 वर्ष), के घुटने में गंभीर सूजन आ गई, और उसे चलने-फिरने में तकलीफ होने लगी। अन्य दो छात्राएं भी दर्द से कराहने लगीं।
स्कूल के हेडमास्टर ने छात्रा की हालत देखकर तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज किया गया। इलाज के बाद छात्रा को घर भेज दिया गया। इस घटना की जानकारी अभिभावकों को दी गई, जिन्होंने शिक्षिका के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। मुनिका कोरवा के परिवार का संबंध विशेष संरक्षित जनजाति (PVTG) वर्ग से है, जिसके कारण शिक्षा विभाग ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया।

त्वरित कार्रवाई और निलंबन
घटना की शिकायत मिलते ही ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) ने तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। जांच में शिक्षिका ज्योति तिर्की को दोषी पाया गया। बीईओ की रिपोर्ट के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षिका को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। डीईओ ने स्पष्ट किया कि बच्चों के साथ मारपीट की कोई भी घटना बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा, “शिक्षकों का कर्तव्य बच्चों को शिक्षित करना और सुरक्षित माहौल प्रदान करना है, न कि उन्हें शारीरिक दंड देना।”
अभिभावकों का गुस्सा, छात्रा का स्कूल छोड़ने का फैसला
मुनिका कोरवा के पिता ने गुस्से में कहा, “हम अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए स्कूल भेजते हैं, न कि पिटाई के लिए। इस तरह की घटना बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” वहीं, मुनिका ने डर के कारण स्कूल जाने से इनकार कर दिया है। उसने कहा, “मैं अब स्कूल नहीं जाऊंगी।” इस घटना ने स्थानीय समुदाय में आक्रोश पैदा कर दिया है, और अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन से इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
शिक्षा विभाग की सख्ती
शिक्षा विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि बच्चों के साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार स्वीकार्य नहीं होगा। डीईओ ने कहा कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों में शामिल किया जाएगा। साथ ही, स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण भी किए जाएंगे।
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