
Chhattisgarh के स्कूल में शिक्षक पर छात्रों के साथ मारपीट का आरोप, जांच शुरू
रायपुर, 1 सितंबर 2025: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के एक राज्य-शासित आवासीय विद्यालय में एक भूगोल शिक्षक पर दो कक्षा 10 के छात्रों के साथ शारीरिक हिंसा करने का गंभीर आरोप लगा है। यह घटना 29 अगस्त को तब सामने आई, जब दो छात्रों के पास मोबाइल फोन पकड़ा गया, जो स्कूल में प्रतिबंधित है। इसके बाद शिक्षक द्वारा दी गई सजा के परिणामस्वरूप एक छात्र को पैर में फ्रैक्चर और अन्य चोटें आईं, जिसने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना का खुलासा और त्वरित कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने तुरंत स्कूल का दौरा किया। उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और घायल छात्र की चोटों की पुष्टि की। आयोग ने शिक्षक के खिलाफ तत्काल निलंबन की सिफारिश की और मामले की गहन जांच के आदेश दिए। डॉ. शर्मा ने स्पष्ट किया कि शारीरिक दंड बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन है और इसे किसी भी शिक्षा संस्थान में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मोबाइल फोन विवाद और जांच का दायरा
जांच में यह भी शामिल किया गया है कि स्कूल में प्रतिबंधित होने के बावजूद छात्रों के पास मोबाइल फोन कैसे पहुंचा। आयोग का कहना है कि बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा और उनके लिए सुरक्षित शिक्षण माहौल सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है। जांच प्रक्रिया में शिक्षक और छात्रों दोनों के बयान दर्ज किए जाएंगे। साथ ही, स्कूल प्रशासन को बच्चों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल
यह घटना स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और शिक्षकों की जिम्मेदारियों पर सवाल उठाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं बाल अधिकार संरक्षण प्रणाली को और मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं। डॉ. शर्मा ने कहा, “शिक्षा संस्थानों को बच्चों के लिए एक सकारात्मक और सुरक्षित वातावरण प्रदान करना होगा, ताकि वे भयमुक्त होकर पढ़ाई कर सकें और उनका शारीरिक व मानसिक विकास बाधित न हो।”
भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने का संकल्प
छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग इस मामले में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ कार्रवाई कर रहा है। आयोग ने स्पष्ट किया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। साथ ही, स्कूलों में बच्चों के हितों की रक्षा के लिए नीतियों को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
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