January 17, 2026
शराब घोटाला: EOW में आरोपी बनाए गए आबकारी के 6 पूर्व अफसरों सहित 28 अफसरों को Supreme Court से मिली जमानत

शराब घोटाला: EOW में आरोपी बनाए गए आबकारी के 6 पूर्व अफसरों सहित 28 अफसरों को Supreme Court से मिली जमानत

Aug 29, 2025

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा आरोपी बनाए गए आबकारी विभाग के 6 पूर्व अधिकारियों सहित कुल 28 अधिकारियों को जमानत दे दी है। यह फैसला शुक्रवार, 29 अगस्त 2025 को सुनाया गया। हालांकि, जमानत के बावजूद कुछ शर्तों के कारण इनमें से कई अधिकारी तत्काल रिहा नहीं हो पाएंगे। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने जांच को प्रभावित न करने की शर्तों के साथ जमानत मंजूर की है।

घोटाले का पृष्ठभूमि और आरोप
छत्तीसगढ़ में 2019 से 2022 के बीच हुए इस शराब घोटाले की राशि को EOW ने 3200 करोड़ रुपये से अधिक आंकी है। जांच में सामने आया कि तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में आबकारी नीति में बड़े बदलाव किए गए, जिसके जरिए एक संगठित सिंडिकेट ने अवैध तरीके से कमीशनखोरी और फर्जी लाइसेंस के माध्यम से भारी मुनाफा कमाया। इस सिंडिकेट में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी जैसे अनिल टुटेजा, अरुणपति त्रिपाठी, निरंजन दास और कारोबारी अनवर ढेबर जैसे नाम शामिल थे।
EOW की जांच के अनुसार, नकली होलोग्राम और डमी कंपनियों के जरिए अवैध शराब की सप्लाई की गई, जिससे सरकारी खजाने को 248 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। इस घोटाले में शामिल 29 आबकारी अधिकारियों में से 22 अभी भी विभाग में कार्यरत हैं, जबकि 7 सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

 

 


सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें जस्टिस अभय ओका और जस्टिस उज्जल भुयान शामिल थे, ने इन 28 अधिकारियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट ने सख्त शर्तों के साथ जमानत मंजूर की, जिसमें यह निर्देश दिया गया कि सभी आरोपी नियमित रूप से अदालती कार्यवाही में शामिल होंगे और जांच को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे। कोर्ट ने यह भी कहा कि सत्र अदालत इन अधिकारियों को उचित नियमों और शर्तों के साथ जमानत देगी।
हालांकि, EOW और ACB की चल रही जांच के कारण कुछ अधिकारी अभी भी जेल में रह सकते हैं। उदाहरण के लिए, पूर्व आबकारी अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी को पहले ही सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी थी, लेकिन EOW की जांच के चलते उनकी रिहाई में देरी हुई।

हाईकोर्ट ने दी थी झटका
इससे पहले, बिलासपुर हाईकोर्ट ने इन 28 आबकारी अधिकारियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की सिंगल बेंच ने साफ कहा था कि इतने बड़े आर्थिक अपराध में आरोपियों को संरक्षण देना उचित नहीं होगा। हाईकोर्ट ने इन अधिकारियों को निचली अदालत में सरेंडर करने और वहां जमानत के लिए आवेदन करने का निर्देश दिया था।

जांच में क्या सामने आया?
EOW और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में सामने आया कि इस घोटाले में एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था, जिसमें आबकारी विभाग के अधिकारियों, कारोबारियों और कुछ नेताओं की मिलीभगत थी। जांच के अनुसार:
विदेशी शराब की सप्लाई के लिए तीन निजी कंपनियों—ओम साईं बेवरेज, नेक्सजेन पावर इंजिटेक, और दिशिता वेंचर्स—को लाइसेंस दिए गए, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हुआ।
नकली होलोग्राम के जरिए अवैध शराब की बिक्री की गई, जिसमें हर महीने 400 ट्रक शराब की सप्लाई होती थी।
इस घोटाले से सिंडिकेट के सदस्यों को करीब 172 करोड़ रुपये की रिश्वत मिली, जिसमें से 57 करोड़ रुपये अकेले 2022-23 के चुनावी वर्ष में कमाए

अब क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब नजरें निचली अदालतों पर टिकी हैं, जहां इन अधिकारियों को जमानत की औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। EOW और ED की जांच अभी भी जारी है, और आने वाले समय में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। इस मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, और अन्य बड़े नाम पहले से ही जेल में हैं।

 

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