
BALOD जिले में मवेशीराज से सड़कों पर उत्पात, 100 से अधिक गौवंश की मौत चिंता का विषय
बालोद जिले के जिला मुख्यालय सहित पूरे शहर की सड़कें अब मवेशियों के कब्जे में हैं। सड़कों पर खुले मवेशी निशानदेही और नियंत्रण की कमी की वजह से गंभीर समस्या बन गए हैं। नेशनल हाइवे से लेकर शहर के भीतरी इलाकों तक, हर प्रमुख मार्गों पर मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है जिससे न केवल वाहनों की आवागमन बाधित हो रही है, बल्कि जान-माल का खतरा भी बढ़ गया है।

आवारा मवेशियों का खतरा और चालकों की दिक्कतें
पत्रिका की टीम ने बुधवार को जिले के मुख्य मार्गों का निरीक्षण किया तो हर सड़क पर मवेशियों के आवागमन का व्यापक नजारा देखा गया। नेशनल हाईवे, पाररास मार्ग, कचहरी चौक, नयापारा मार्ग जैसे स्थानों पर मवेशी सड़क पर बैठे या घूमते हुए मिले। वाहन चालक इन्हें बचाते-बचाते सावधानीपूर्वक वाहन चलाते नजर आते हैं। ऐसे में न केवल मशक्कत होती है, बल्कि दुर्घटना का खतरा भी हमेशा बना रहता है।
पशु मालिकों पर कार्रवाई का अभाव
हालांकि प्रदेश के कई जिलों में मवेशियों को खुला छोड़ने वाले पशु मालिकों पर एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, लेकिन बालोद जिले में अभी तक पशु मालिकों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। जिले में कागजी आदेशों और घोषणाओं के आलावा ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिल रही है। नतीजा यह है कि मवेशीराज पूरी तरह कायम है और पशु मालिक बेखौफ खुले में पशुओं को छोड़ते हैं।
नगर निगम का प्रयास और व्यवस्थाएं
नगर पालिका के अधिकारी दावा करते हैं कि शहर की सड़कों से मवेशियों को हटाने के लिए कर्मचारी तैनात किए गए हैं, जो सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक सक्रिय रहते हैं। इसके अलावा, पशु चिकित्सा विभाग ने भी रेडियम पट्टी बांधने की पहल की है, लेकिन फिलहाल इसका कार्य शुरू नहीं किया गया है। पालिका के सीएमओ मोबिन अली का कहना है कि जल्द ही पशु मालिकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और सड़कों को सुरक्षित बनाया जाएगा।

मवेशियों की मौत और सुरक्षा की चिंता
बालोद जिला मुख्यालय में पिछले कुछ वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं में करीब 100 से अधिक गौवंशों की मौत हुई है। इसके अलावा, कई मवेशियों की हत्यारों को अभी तक पकड़ नहीं पाया गया है। नेशनल हाईवे में भी आवारा मवेशियों का जमावड़ा खासा बढ़ गया है, जहां हर 200 से 250 मीटर के बाद मवेशियों का समूह देखा जाता है। इससे न केवल मवेशियों को खतरा है बल्कि वाहन चालकों की भी सुरक्षा जोखिम में है। वहीं, ऐसे कई वाहन चालक भी दुर्घटना में घायल हो चुके हैं।

राज्य सरकार के निर्देश और नतीजा
राज्य सरकार ने पशु मालिकों के खिलाफ सख्त कानून बनाने और उनकी पहचान कर एफआईआर दर्ज कराने के आदेश जारी किए हैं ताकि सड़कों पर मवेशियों की समस्या को निपटाया जा सके। लेकिन बालोद जिले में इन आदेशों का पालन अभी तक प्रभावी ढंग से नहीं हो पाया है।
मवेशियों की सुरक्षा और सड़क सुरक्षा दोनों को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन और नगर निगम को शीघ्र ठोस कदम उठाने की जरुरत है। आवारा मवेशियों के कारण हो रही समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए उन्हें नियंत्रित करने के लिए प्रभावी नीतियां बनाई जाएं ताकि शहरवासियों और पशुओं दोनों की जान सुरक्षित रह सके।
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