
Himachal Pradesh में मानसून ने मचाई भारी तबाही, 2 राष्ट्रीय राजमार्ग समेत 600 से अधिक सड़कें तबाह, भारी बारिश का Alert जारी
हिमाचल प्रदेश में मानसून की तेजी ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) की रिपोर्ट के अनुसार, भारी बारिश के कारण शुक्रवार की सुबह तक 2 राष्ट्रीय राजमार्गों सहित कुल 633 सड़कें तबाह हो चुकी हैं। इससे राज्य के ज्यादातर जिले प्रभावित हुए हैं, खासकर मंडी, कुल्लू और कांगड़ा जिले में हालात अत्यंत गंभीर हैं।

मानवीय और भौतिक नुकसान
राज्य में अब तक भारी बारिश और उससे जुड़ी अन्य आपदाओं जैसे भूस्खलन, बाढ़, बादल फटना, डूबने और बिजली के झटकों के कारण 160 और सड़क दुर्घटनाओं में 152 व्यक्तियों की मौत हो चुकी है, कुल मौतों की संख्या 312 तक पहुंच गई है। इसके अलावा, भारी बारिश से 1,333 बिजली वितरण ट्रांसफार्मर (डीटीआर) पूरी तरह से ठप हो गए हैं, जिसके चलते राज्य में कई इलाकों में बिजली सेवा बाधित है।
प्रभावित जिले और सड़कों की स्थिति
- मंडी जिले में 241 सड़कें बंद, जिनमें एक राष्ट्रीय राजमार्ग भी शामिल है।
- कुल्लू जिले में 166 सड़कें अवरुद्ध।
- कांगड़ा जिले में 65 सड़कें बंद।
- शिमला जिले में 31 सड़कें बंद।
- लाहौल-स्पीति जिले में 21 सड़कें बंद।
- ये सड़कें बंद होने से जनजीवन बाधित हुआ है और विशेषकर खाद्य एवं औषधि आपूर्ति प्रभावित हुई है।

सब्जी और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित
मंडी क्षेत्र में सब्जी और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति धीमी हो गई है। सब्जी वितरक आशीष शर्मा ने बताया कि वांछित वस्तुओं के परिवहन के लिए मजदूरी का खर्च बढ़ गया है, जिससे वित्तीय संकट उत्पन्न हो गया है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि सड़क मरम्मत के कार्यों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि आपूर्ति में सुधार हो सके।
मौसम विभाग का अलर्ट और भविष्य की आशंका
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कुल्लू जिले के लिए येलो अलर्ट जारी किया है, जहां दोपहर 12 बजे तक प्रति घंटे 5-15 मिमी बारिश होने की संभावना है। वहीं, कांगड़ा जिले के लिए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। आईएमडी ने हिमाचल प्रदेश में अगले छह दिनों तक भारी बारिश जारी रहने की भविष्यवाणी की है, जिससे बाढ़ और भूस्खलन की आशंका बनी हुई है।

प्रशासन की तैयारी और सतर्कता
एसडीएमए ने लोगों को सतर्क रहने और भारी बारिश के दौरान अनावश्यक बाहर न निकलने की सलाह दी है। प्रशासन ने बचाव और राहत कार्य के लिए संसाधनों को तैनात किया है, लेकिन तीव्र बारिश और संभावित बाढ़ की वजह से सहायता पहुँचाने में कठिनाई हो सकती है। स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन टीमें 24 घंटे मुस्तैद हैं।

हिमाचल प्रदेश में मानसून की इस तबाही ने न सिर्फ सड़कों और बुनियादी ढांचे को बर्बाद कर दिया है, बल्कि हजारों परिवारों की जिंदगी को भी प्रभावित कर दिया है। आईएमडी के लगातार अलर्ट के मद्देनजर, लोगों को सावधानी बरतने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की जरूरत है। राहत और पुनर्निर्माण कार्यों में तेजी लाना प्रदेश के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती है.
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