
रॉयल बंगाल Tiger की यात्रा: छत्तीसगढ़ से Odisha और झारखंड की ओर
एक आवारा रॉयल बंगाल टाइगर के छत्तीसगढ़ के गोमाड़ा वन्यजीव अभयारण्य से निकलकर ओडिशा की झारसुगुड़ा और सांबलपुर के जंगलों के रास्ते झारखंड की ओर बढ़ने की खबरें आई हैं, जिसके कारण तीन राज्यों में वन्यजीव विभाग सतर्क हो गए हैं और टाइगर की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है.

बाघ के आवागमन का विवरण
यह नर टाइगर छत्तीसगढ़ के गोमाड़ा अभयारण्य से अगस्त की शुरुआत में निकला और लगभग 100 किलोमीटर की दूरी तय कर ओडिशा के कई वन क्षेत्रों से होते हुए अब झारखंड में प्रवेश कर सकता है.
ओडिशा के झारसुगुड़ा वन प्रभाग ने बाघ के पंजे के निशानों की पुष्टि की है, जो छत्तीसगढ़ के वन विभाग द्वारा लिए गए निशानों से मेल खाते हैं.
छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड के वन्य विभागों के अधिकारी इस बाघ की हरकतों पर लगातार नजर रख रहे हैं और सूचनाओं का आदान-प्रदान कर रहे हैं.

पर्यावरणीय और सुरक्षा उपाय
- राज्यों के वन विभाग इस बाघ की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सहयोग कर रहे हैं ताकि वह मानव आबादियों में घिरने से बचा जा सके.
- स्थानीय लोगों को भी सतर्क रहने और बाघ के संपर्क से बचने के लिए सलाह दी गई है ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष से बचा जा सके.
- इस क्षेत्र के वन विभाग ने कैमरा ट्रैप और पैदल गश्त बढ़ा दी है ताकि बाघ की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई जा सके.
- यह बाघ का आवागमन न केवल प्रकृति की सुंदरता को दर्शाता है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और सुरक्षित सह-अस्तित्व की चुनौतियों को भी उजागर करता है.
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