
भारतीय वस्त्र उद्योग को राहत: कपास पर आयात शुल्क छूट 31 December 2025 तक बढ़ी
नई दिल्ली।
भारतीय वस्त्र और परिधान उद्योग के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने कपास (Cotton) पर आयात शुल्क छूट को बढ़ाते हुए इसकी अवधि अब 31 दिसंबर 2025 तक कर दी है। यह निर्णय उद्योग जगत को आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ाने और निर्यातकों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देने के उद्देश्य से लिया गया है।

उद्योग को मिलेगा सहारा
भारत का वस्त्र उद्योग कपास पर काफी हद तक निर्भर है। पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में अस्थिरता और घरेलू स्तर पर आपूर्ति की चुनौतियों ने उद्योग पर दबाव बढ़ा दिया था। आयात शुल्क में छूट से वस्त्र उद्योग को सस्ती दरों पर कच्चा माल मिलेगा और इससे उत्पादन लागत में भी कमी आएगी।
निर्यातकों को बढ़त
सरकार का मानना है कि यह कदम भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में मजबूत स्थिति दिलाएगा। छूट की वजह से वस्त्र और परिधान की लागत कम होगी, जिससे भारत को बांग्लादेश, वियतनाम और चीन जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी।

सरकार का उद्देश्य
वित्त मंत्रालय और वस्त्र मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, इस निर्णय का उद्देश्य दोहरा है—
- 1. घरेलू बाजार में कपास की स्थिर उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- 2. ‘मेक इन इंडिया’ और ‘एक्सपोर्ट प्रमोशन’ को प्रोत्साहित करना।

उद्योग से मिली प्रतिक्रिया
टेक्सटाइल इंडस्ट्री के विशेषज्ञों और निर्यातकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह कदम उद्योग को राहत देने के साथ-साथ रोजगार और उत्पादन दोनों को बढ़ावा देगा।
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