
Principal पर छेड़छाड़ का आरोप: छात्राएं दो गुटों में बंटीं, एक पक्ष बोला- झूठे आरोप, दूसरा मांग रहा सख्त कार्रवाई
घटना के तीन दिन बाद भी कोई विभागीय कदम नहीं, छात्रों ने किया दो घंटे प्रदर्शन
जशपुर जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिमड़ा में प्राचार्य सुधीर बरला पर महिला व्याख्याता और एक अन्य महिला कर्मचारी से छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले ने बुधवार को नया मोड़ ले लिया, जब दो एफआईआर दर्ज होने के बावजूद प्राचार्य पर कोई विभागीय कार्रवाई नहीं की गई। इस निष्क्रियता के खिलाफ स्कूल के छात्रों ने विद्यालय गेट के बाहर लगभग दो घंटे तक प्रदर्शन किया। हैरानी की बात यह है कि प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच भी मतभेद उभर आए और वे दो गुटों में बंट गए। एक गुट प्राचार्य के समर्थन में खड़ा होकर उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई का विरोध कर रहा था, जबकि दूसरा गुट उन्हें तत्काल निलंबित करने और सख्त विभागीय कार्रवाई की मांग कर रहा था।
महिला व्याख्याता और कर्मचारी द्वारा लगाए गए इन आरोपों के बाद बगीचा थाने में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, एफआईआर के बावजूद विभाग की सुस्ती से प्राचार्य का मनोबल बढ़ा हुआ है। आरोप है कि वे स्कूल के कुछ छात्रों को अपने पक्ष में भड़का रहे हैं और उन्हें प्रदर्शन के लिए उकसा रहे हैं। इस वजह से विद्यालय परिसर में तनावपूर्ण माहौल बन गया है, जिससे छात्रों और शिक्षकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने नारे लगाए और प्लेकार्ड्स दिखाए, जिसमें एक तरफ ‘प्राचार्य निर्दोष हैं’ जैसे संदेश थे, तो दूसरी तरफ ‘महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करो’ जैसी मांगें लिखी थीं।

अधिकारियों ने पहुंचकर संभाला मोर्चा, दिया कार्रवाई का आश्वासन
जैसे ही प्रदर्शन की सूचना मिली, विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) सुदर्शन पटेल और एसडीओपी दिलीप कोसले तुरंत स्कूल पहुंचे। उन्होंने छात्रों से बातचीत की, उन्हें समझाया और हड़ताल खत्म करवाई। अधिकारियों की समझाइश के बाद छात्र कक्षाओं में लौट गए, लेकिन इस दौरान स्कूल प्रबंधन की भूमिका पर कई सवाल उठे। बीईओ सुदर्शन पटेल ने बताया कि कुछ शिक्षकों और कर्मचारियों पर छात्रों को उकसाने का आरोप लगा है। इसकी विभागीय जांच चल रही है और रिपोर्ट जल्द ही उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी।
बीईओ ने स्पष्ट किया कि प्राचार्य सुधीर बरला के खिलाफ दर्ज एफआईआर की जानकारी विभाग को है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरगुजा आयुक्त को पत्र भेजा जा चुका है और आगे की कार्रवाई उच्च स्तर से होगी। चूंकि यह मामला महिला कर्मचारियों से जुड़ा है, इसलिए पुलिस जांच भी तेजी से चल रही है। उन्होंने कहा, “हम छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से ले रहे हैं और जल्द ही उचित कदम उठाए जाएंगे।”

विभाग की निष्क्रियता पर उठ रहे सवाल, पढ़ाई प्रभावित
इस प्रकरण ने शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला कर्मचारियों द्वारा गंभीर आरोप लगाने और एफआईआर दर्ज होने के तीन दिन बाद भी आरोपी प्राचार्य को निलंबित क्यों नहीं किया गया? इससे न केवल विद्यार्थियों में भ्रम फैल रहा है, बल्कि स्कूल की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। छात्रों के दो गुटों में बंटने से शिक्षकों के लिए कक्षाएं संचालित करना मुश्किल हो गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई न होने से महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठते हैं।
इस घटना ने जशपुर जिले में महिला सुरक्षा और शिक्षा संस्थानों में प्रशासनिक सख्ती की जरूरत पर बहस छेड़ दी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा, लेकिन छात्र और कर्मचारी जल्द न्याय की उम्मीद कर रहे हैं। मामले पर आगे की अपडेट्स के लिए बने रहें।
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