
Silger में नक्सलियों ने शिक्षादूत की हत्या, अब तक 7 की जान ले चुके नक्सली
28-8-2025
Chhattisgarh के बीजापुर-सुकमा जिले की सीमा पर स्थित सिलगेर गांव में नक्सलियों ने एक शिक्षादूत की हत्या कर दी। मृतक की पहचान लक्ष्मण बाडसे के रूप में हुई है, जो मंडेमरका में शिक्षादूत के रूप में कार्यरत थे।

लक्ष्मण बाडसे भोपालपटनम ब्लॉक के पेगड़ापल्ली गांव के निवासी थे और उनकी ससुराल सिलगेर में थी। नक्सलियों ने उन्हें पुलिस का मुखबिर होने का आरोप लगाते हुए धारदार हथियार से मौत के घाट उतार दिया। जानकारी के मुताबिक, इससे पहले भी उन्हें नक्सलियों से लगातार धमकियां मिल रही थीं।
अब तक 7 शिक्षादूतों की हत्या
बीजापुर और सुकमा जिलों में यह कोई पहली घटना नहीं है। अब तक नक्सली 7 शिक्षादूतों की हत्या कर चुके हैं। वर्तमान में सुकमा में 90 और बीजापुर में 191 शिक्षादूत सेवाएं दे रहे हैं। ये सभी स्थानीय युवा हैं, जिन्होंने 12वीं तक की शिक्षा हासिल की है और सीमित संसाधनों के बावजूद नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों को पढ़ा रहे हैं।

कठिन परिस्थितियों में शिक्षा की सेवा
शिक्षादूतों को सुकमा में 11 हजार और बीजापुर में 10 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जाता है। बेहद जोखिम भरे माहौल में ये शिक्षादूत आदिवासी बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने का काम कर रहे हैं। वे अक्सर पेड़ों के नीचे या झोपड़ियों में पाठशाला लगाकर पढ़ाते हैं।
सरकार और सुरक्षा बलों के लिए चुनौती
इस घटना ने एक बार फिर नक्सल प्रभावित इलाकों में शिक्षकों और शिक्षा सेवाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षादूतों पर लगातार बढ़ते हमले सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं।
सिलगेर में नक्सलियों का हमला
Bijapur-Sukma बॉर्डर के सिलगेर गांव में नक्सलियों ने शिक्षादूत लक्ष्मण बाडसे की धारदार हथियार से हत्या कर दी। उन पर पुलिस मुखबिर होने का आरोप लगाया गया था।

अब तक 7 शिक्षादूतों की हत्या
नक्सल प्रभावित इलाकों में 281 शिक्षादूत सेवाएं दे रहे हैं, सीमित संसाधनों में बच्चों को पेड़ों के नीचे और झोपड़ियों में पढ़ाते हैं।
मानदेय
सुकमा में ₹11,000, बीजापुर में ₹10,000 प्रति माह।
जोखिम के बावजूद शिक्षा की रोशनी फैला रहे ये स्थानीय युवा।
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