March 4, 2026
IIT MUMBAI के पूर्व छात्र संवारेंगे छत्तीसगढ़ के युवाओं का भविष्य, गैर लाभकारी Companyकरेगी कौशल विकास

IIT MUMBAI के पूर्व छात्र संवारेंगे छत्तीसगढ़ के युवाओं का भविष्य, गैर लाभकारी Companyकरेगी कौशल विकास

Aug 27, 2025

27 अगस्त 2025 छत्तीसगढ़ रायपुर,  के युवाओं के लिए नई पहल की शुरुआत होने जा रही है। राज्य सरकार ने आईआईटी मुंबई के पूर्व छात्रों के साथ मिलकर एक गैर लाभकारी संयुक्त उद्यम कंपनी बनाई है, जो राज्य के युवाओं, महिलाओं और थर्ड जेंडर को कौशल प्रशिक्षण देकर शत प्रतिशत प्लेसमेंट और मार्केट लिंकेज उपलब्ध कराएगी।

 

इस योजना की शुरुआत अक्टूबर 2025 से रायपुर, बलरामपुर और जशपुर जिलों में होगी। पहले चरण में यह कंपनी इन जिलों के आईटीआई भवनों से प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाएगी, जिसके लिए तकनीकी शिक्षा विभाग सहयोग करेगा। अगले चरण में सरकार विशेष भवन तैयार करेगी और उनमें मशीनें, उपकरण एवं फर्नीचर लगाने की जिम्मेदारी कंपनी की होगी।

पांच साल तक काम करेगी कंपनी

कंपनी का कार्यकाल शुरू में 5 साल का होगा। यदि इसका कामकाज संतोषजनक पाया गया तो इसकी अवधि बढ़ाई जाएगी। संचालन के लिए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का गठन किया गया है।

10 लाख की पूंजी से बनेगी कंपनी

कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 8 के तहत गठित यह कंपनी गैर लाभकारी होगी। इसकी देय पूंजी 10 लाख रुपए तय की गई है। इसमें पैन आईआईटी के साथ-साथ आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग, राज्य अन्तयावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम, पंचायत विभाग, तकनीकी शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग की हिस्सेदारी होगी। इसकी निगरानी मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी करेगी।

 

आर्थिक रूप से कमजोरों के लिए विशेष अवसर

कंपनी लाइवलीहुड कॉलेजों के माध्यम से गरीब और वंचित वर्ग के युवाओं को श्रेष्ठ व्यावसायिक शिक्षा और रोजगार के अवसर देगी। राज्य सरकार का मानना है कि इस मॉडल से छत्तीसगढ़ के युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध होगा और उद्योगों को कुशल श्रमिक मिलेंगे।

 

आईआईटी भिलाई की बड़ी उपलब्धि : नैनो कैटलिस्ट से बदलेगा प्लास्टिक उद्योग

  • इस बीच, छत्तीसगढ़ स्थित आईआईटी भिलाई ने प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान ने एक खास नैनो कैटलिस्ट (Nano Zero Valent Iron) तैयार किया है।
  • जब प्लास्टिक को इस कैटलिस्ट के संपर्क में लाया जाता है, तो केमिकल रिएक्शन के जरिए यह उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ देता है। ये टुकड़े पीईटी (Polyethylene Terephthalate) के मूल रसायन होते हैं, जिनसे फिर से नई बोतलें या पैकेजिंग बनाई जा सकती है।
  • यह तकनीक न केवल कचरे से छुटकारा दिलाएगी, बल्कि प्लास्टिक उद्योग में गेम चेंजर साबित हो सकती है, क्योंकि इससे पुरानी बोतलों को बिना गुणवत्ता खोए नए उत्पादों में बदला जा सकेगा।

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