
राज्य शासन ने सार्वजनिक स्थानों पर पंडालों, जुलूस और रैली के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश किए जारी
रायपुर, 26 अगस्त 2025: छत्तीसगढ़ राज्य शासन ने सार्वजनिक स्थानों पर पंडाल, जुलूस, रैली और अन्य छोटे-बड़े आयोजनों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह कदम त्योहारी सीजन और सार्वजनिक आयोजनों के दौरान यातायात व्यवस्था, सुरक्षा और आम जनता की सुविधा को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

आयोजनों का वर्गीकरण
राज्य शासन ने अपने आदेश में आयोजनों को भीड़ और स्थान के आधार पर दो श्रेणियों में विभाजित किया है। छोटे आयोजनों में 500 लोगों तक की भीड़ और 5000 वर्ग फीट तक का स्थान शामिल होगा, जबकि बड़े आयोजनों में 500 से अधिक लोग या 5000 वर्ग फीट से अधिक क्षेत्रफल वाले आयोजन शामिल किए गए हैं। इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य आयोजनों के दौरान अव्यवस्था को रोकना और व्यवस्थित प्रबंधन सुनिश्चित करना है।

अनुमति लेना अनिवार्य
गृह (पुलिस) विभाग द्वारा पहले से जारी 22 अप्रैल 2022 के आदेश के अनुसार, किसी भी सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक या अन्य सार्वजनिक आयोजन के लिए जिला प्रशासन से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है। आयोजकों को निर्धारित प्रारूप में आवेदन और शपथ पत्र जमा करना होगा, जिससे सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को सुनिश्चित किया जा सके। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब तक नई नीति लागू नहीं होती, तब तक ये दिशा-निर्देश प्रभावी रहेंगे।

हाईकोर्ट की सख्ती
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हाल ही में सड़कों पर बिना अनुमति के पंडाल और स्वागत द्वार लगाए जाने के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है। रायपुर निवासी नितिन सिंघवी द्वारा दायर जनहित याचिका में बताया गया कि वर्ष 2022, 2023 और 2024 में गणेश और दुर्गा उत्सवों के दौरान कई स्थानों पर बिना अनुमति पंडाल लगाए गए, जिससे यातायात बाधित हुआ और आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ा। कोर्ट ने राज्य सरकार को इस संबंध में नई नीति तैयार करने के लिए 6 सप्ताह का समय दिया है, और अगली सुनवाई 2 सितंबर 2025 को निर्धारित की गई है।

यातायात और सुरक्षा पर जोर
याचिकाकर्ता नितिन सिंघवी ने बताया कि रायपुर जैसे शहरों में सड़कों पर बेतरतीब पंडाल और आयोजन यातायात व्यवस्था को बाधित करते हैं। खासकर तंग गलियों और व्यस्त सड़कों पर होने वाले आयोजनों से आम नागरिकों को भारी असुविधा होती है। हाईकोर्ट ने भी इस बात पर जोर दिया कि आयोजनों के लिए जिला प्रशासन की अनुमति अनिवार्य है, ताकि यातायात प्रबंधन और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
नई नीति की प्रतीक्षा
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को सूचित किया कि नई गाइडलाइंस तैयार करने में कई विभागों का सहयोग आवश्यक है, जिसके लिए अतिरिक्त समय की जरूरत है। तब तक मौजूदा दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने का आदेश दिया गया है। यह कदम न केवल त्योहारी सीजन बल्कि अन्य सार्वजनिक आयोजनों के लिए भी लागू होगा, ताकि शहरों में व्यवस्था बनी रहे।
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