
High Court से पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे चैतन्य बघेल की याचिका खारिज
रायपुर। भिलाई के 3,200 करोड़ रुपये के चर्चित शराब घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में आरोपित पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने सोमवार को उनकी याचिका खारिज कर दी। हालांकि, कोर्ट ने उन्हें जमानत के लिए नई याचिका दायर करने की सशर्त छूट दी है।
चैतन्य ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) की कार्रवाई को राजनीतिक विद्वेष बताते हुए चुनौती दी थी। उन्होंने अपनी गिरफ्तारी को अवैध ठहराते हुए जमानत की मांग भी रखी थी।

अधिवक्ताओं की दलीलें
चैतन्य की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन पगारिया ने याचिका दायर की थी, जबकि सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने पैरवी की। वहीं, सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि आगे की जांच में याचिकाकर्ता का नाम सामने आया है और फिलहाल वह ईडी की कस्टडी में है।
ईडी का आरोप
ईडी ने अदालत को बताया कि चैतन्य बघेल ने शराब घोटाले से अर्जित ब्लैक मनी को रियल एस्टेट कारोबार में खपाया। शराब कारोबारी लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ पप्पू के बयान के अनुसार, उसने और चैतन्य बघेल ने मिलकर 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम को हैंडल किया।
गौरतलब है कि ईडी ने चैतन्य को 18 जुलाई को भिलाई से गिरफ्तार किया था। यह पूरा घोटाला उस समय अंजाम दिया गया था, जब उनके पिता भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री थे।
घोटाले के अन्य आरोपी
इस मामले में तत्कालीन आबकारी मंत्री और वर्तमान में कोंटा से कांग्रेस विधायक कवासी लखमा भी आरोपित हैं। वह 15 जनवरी से रायपुर स्थित सेंट्रल जेल में बंद हैं।
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