
Teeja उपवास: करु भात की परंपरा और बाजार में बढ़ती मांग
छत्तीसगढ़, 25 अगस्त 2025: तीजा उपवास, छत्तीसगढ़ की एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा, इस बार फिर से महिलाओं के बीच उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है। इस अवसर पर “करु भात” (करेला भात) की विशेष भूमिका और इसकी बढ़ती मांग ने बाजारों में रौनक ला दी है।

तीजा उपवास की परंपरा
तीजा उपवास में महिलाएं अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। इस उपवास की शुरुआत “करु भात” खाने के साथ होती है। यह विशेष भोजन महिलाओं को निर्जला उपवास के दौरान शारीरिक रूप से मजबूत रहने में मदद करता है। परंपरा के अनुसार, उपवास शुरू करने से पहले करु भात खाया जाता है, जो करेले और चावल से तैयार किया जाता है।
करु भात का महत्व
करु भात का सेवन केवल एक रस्म नहीं, बल्कि इसका वैज्ञानिक आधार भी है। माना जाता है कि करेले का सेवन शरीर में तरल पदार्थों को बनाए रखने में मदद करता है, जिससे निर्जला उपवास के दौरान प्यास कम लगती है। करेले की तासीर ठंडी होती है, जो शरीर को लंबे समय तक हाइड्रेटेड रखने में सहायक होती है। यही कारण है कि तीजा उपवास से पहले करु भात खाने की परंपरा प्रचलित है।

बाजार पर प्रभाव
तीजा उपवास से पहले करेले की मांग में भारी उछाल देखा गया है। इस बार बाजार में करेले की कीमत ₹100 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। व्यापारियों का कहना है कि तीजा के मौके पर करेले की मांग इतनी बढ़ जाती है कि आपूर्ति कम पड़ने लगती है। कई इलाकों में किसानों ने भी इस अवसर का लाभ उठाने के लिए करेले की खेती पर विशेष ध्यान दिया है।
बाजारों में भीड़
तीजा की तैयारियों के लिए बाजारों में भारी भीड़ देखी गई। लोग करेले के साथ-साथ पूजा सामग्री, फल, और अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी के लिए बाजारों में उमड़ पड़े। स्थानीय व्यापारी रामलाल साहू ने बताया, “तीजा के दौरान करेले की बिक्री कई गुना बढ़ जाती है। लोग सुबह से ही बाजार में आकर ताजा करेले खरीद रहे हैं।”
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