
Durg शिक्षा की राह में खतरा: पुल के अभाव में रोज़ नाले को पार करते मासूम बच्चे
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के धमधा ब्लॉक में बसे ग्राम मुड़पार के बच्चों के लिए शिक्षा का सफर किसी जोखिम भरे साहसिक अभियान से कम नहीं है। गांव में केवल पांचवीं कक्षा तक स्कूल होने के कारण, इससे आगे की पढ़ाई के लिए बच्चों को 3 किलोमीटर दूर घोटवानी गांव जाना पड़ता है। लेकिन इस सफर में एक उफनता नाला उनकी राह में सबसे बड़ी बाधा बनकर खड़ा है।
जोखिम भरा सफर, डर के साये में पढ़ाई
हाथ में किताबों का बस्ता और मन में डर लिए मुड़पार के नन्हें बच्चे रोज़ इस खतरनाक नाले को पार करते हैं। बरसात के मौसम में यह नाला और भी खतरनाक हो जाता है, जब तेज बहाव बच्चों के लिए जानलेवा बन जाता है। कई बच्चों की साइकिलें बह चुकी हैं, तो कई बार किताबें और कपड़े भीगने के कारण उन्हें स्कूल से वापस लौटना पड़ता है। इस जोखिम भरे रास्ते ने कई बच्चों को मजबूरी में पढ़ाई छोड़ने के लिए विवश कर दिया है।

आज़ादी के 78 साल बाद भी अधूरी सुविधाएं
ग्रामवासियों का कहना है कि आज़ादी के 78 साल बीत जाने के बाद भी मुड़पार में नाले पर पुल और गांव तक पक्की सड़क का निर्माण नहीं हो सका है। नाले के एक ओर आमनेर नदी और दूसरी ओर उफनता नाला होने के कारण बरसात में गांव पूरी तरह कट जाता है। स्थानीय निवासी शांति बाई ने बताया, “बरसात में नाला पार करना जान जोखिम में डालने जैसा है। अब तक इस नाले में दो बच्चों की जान जा चुकी है।” ग्रामीणों का गुस्सा इस बात पर है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहा।

बच्चों का दर्द: पढ़ाई या जान, क्या चुनें?
मुड़पार के बच्चों का कहना है कि पढ़ाई उनके भविष्य का आधार है, लेकिन स्कूल तक पहुंचने का रास्ता उनकी हिम्मत की हर दिन परीक्षा लेता है। बारह साल की रानी ने बताया, “हमें डर लगता है, लेकिन पढ़ाई के लिए नाला पार करना पड़ता है। बरसात में पानी इतना तेज होता है कि कई बार गिरने का डर रहता है।” बच्चों की यह मजबूरी और हिम्मत शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है कि क्या पढ़ाई के लिए बच्चों को अपनी जान जोखिम में डालनी होगी?

ग्रामीणों की मांग: जल्द बने पुल और सड़क
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि नाले पर पुल और गांव तक पक्की सड़क का निर्माण न केवल बच्चों की शिक्षा को सुरक्षित बनाएगा, बल्कि गांव की अन्य समस्याओं को भी हल करेगा। स्थानीय सरपंच रामलाल साहू ने कहा, “हम कई बार प्रशासन से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन हर बार सिर्फ़ आश्वासन मिलता है। अब समय है कि ठोस कदम उठाए जाएं।”
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