
Corona की सादगी में मनाया जाएगा खेती-किसानी से जुड़ा पर्व पोला-तीजा, नहीं होगी बैल दौड़ प्रतियोगिता
रायपुर। छत्तीसगढ़ की परंपरा और संस्कृति से गहराई से जुड़ा पोला-तीजा पर्व इस बार कोरोना संक्रमण की वजह से सादगी से मनाया जाएगा। हर साल की तरह इस बार बैल दौड़ प्रतियोगिता आयोजित नहीं की जाएगी। बच्चे केवल अपने घरों में मिट्टी के बैल दौड़ाएंगे। वहीं, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी आज दोपहर 12 बजे मुख्यमंत्री निवास में पारंपरिक पूजा में शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री निवास पर परंपरागत सजावट और सेल्फी जोन
पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री आवास को पारंपरिक ढंग से सजाया गया है। यहां नांदिया-बैला की पूजा की जाएगी। साथ ही लोगों के लिए एक सेल्फी जोन भी बनाया गया है, जहां नांदिया-बैला के साथ तस्वीरें ली जा सकेंगी। रइचुली झूला और चकरी झूला भी लगाया गया है।

हर साल होती थी बैल दौड़ प्रतियोगिता
आमतौर पर किसान अपने बैलों को श्रृंगार कर प्रतियोगिता में शामिल होते थे। हजारों लोगों की भीड़ इस कार्यक्रम को देखने पहुंचती थी। लेकिन इस बार कोरोना को देखते हुए प्रतियोगिता स्थगित कर दी गई है। हालांकि, परंपरा निभाने के लिए किसान बैलों की पूजा करेंगे और बच्चे मिट्टी के बैल दौड़ाएंगे। बाजारों में मिट्टी के बैल पहले से ही बिकने लगे हैं।
धरती, अन्न और बैल को सम्मान देने का पर्व
पोला पर्व किसान बैलों, धरती और अन्न को सम्मान देने का पर्व माना जाता है। इस अवसर पर घरों में ठेठरी, खुरमी, गुड़-चीला, गुलगुल भजिया, गुजिया, मूठिया और तसमई जैसे छत्तीसगढ़ी पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं। किसान अपने बैलों को स्नान कराकर श्रृंगार करते हैं, सींगों पर माहुर, खुरों पर नेल पॉलिश और गले में घुंघरू, घंटी व कौड़ी के आभूषण पहनाते हैं।
पौराणिक मान्यता
मान्यता है कि भगवान कृष्ण के बाल्यकाल में कंस ने पोलासुर नामक राक्षस को मारने भेजा था। कृष्ण ने उसका वध भाद्रपद अमावस्या के दिन किया था। तभी से इस दिन को पोला पर्व के रूप में मनाया जाता है।
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