
Jagadlpur के सरकारी स्कूलों में डिजिटल लैब की शुरुआत, छात्रों को मिलेगा तकनीकी लाभ
जगदलपुर, छत्तीसगढ़। शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए बस्तर जिले के सरकारी स्कूलों में एक नई पहल शुरू की गई है। जिला शिक्षा विभाग ने 50 डिजिटल लैब स्थापित की हैं, जिससे ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को आधुनिक टेक्नोलॉजी के साथ पढ़ाई का अनुभव प्राप्त होगा। यह पहल राज्य के युवा वर्ग को 21वीं सदी की तकनीकी शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

डिजिटल लैब में क्या-क्या है खास?
इन डिजिटल लैब्स में स्मार्ट बोर्ड, अत्याधुनिक कंप्यूटर, हाई-स्पीड इंटरनेट, प्रोजेक्टर, एलईडी डिस्प्ले और ऑडियो-विजुअल लर्निंग टूल्स जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। इन लैब्स में बच्चे केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इंटरैक्टिव क्लासरूम, वर्चुअल सिमुलेशन, ऑनलाइन टेस्टिंग, वीडियो लेक्चर और डिजिटल असाइनमेंट जैसी आधुनिक विधाओं का लाभ उठा सकेंगे। विद्यार्थियों को कंप्यूटर ऑपरेटिंग, बेसिक कोडिंग, ग्राफिक्स डिजाइनिंग से लेकर साइंस और गणित के वास्तविक प्रयोग (एक्सपेरिमेंट्स) तक का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

शिक्षा विभाग का उद्देश्य व अधिकारियों का बयान
जिला शिक्षा अधिकारी संजीव कुमार ने बताया, “डिजिटल लैब के माध्यम से बस्तर जैसे पिछड़े और दूरस्थ इलाकों के बच्चे भी अब आधुनिक तकनीकी शिक्षा से जुड़ सकेंगे। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा। इन लैब्स में कंप्यूटर की बुनियादी जानकारी, तकनीकी कौशल, डिजिटल साक्षरता, इंटरनेट का सुरक्षित उपयोग और ऑनलाइन व्यवहार सिखाया जा रहा है। अगले चरण में जिले के सभी सरकारी स्कूलों में डिजिटल लैब स्थापित करने का लक्ष्य है।”
ग्रामीण और आदिवासी बच्चों को मिलेगा सीधा फायदा
अब तक जिले के 7,000 से अधिक बच्चों ने इन डिजिटल लैब्स की सुविधाओं का लाभ उठाया है। विशेष रूप से आदिवासी समुदाय के बच्चों के लिए यह पहल वरदान साबित हो रही है, क्योंकि इन क्षेत्रों में इंटरनेट और डिजिटल संसाधनों तक पहुँच पहले सीमित थी। बच्चे अब बिना किसी झिझक के कंप्यूटर चलाना, प्रेजेंटेशन बनाना और वर्चुअल लर्निंग में हिस्सा लेना सीख रहे हैं। अभिभावकों ने भी इस पहल का स्वागत किया है और बच्चों की पढ़ाई में आए सकारात्मक बदलावों की सराहना की है।
शिक्षकों को दी गई डिजिटल ट्रेनिंग
इस नई व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। उन्हें ऑनलाइन शिक्षण, वर्चुअल टूल्स, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म, वीडियो रिकॉर्डिंग और एडिटिंग जैसी तकनीकों में प्रशिक्षित किया गया है। इससे शिक्षक बच्चों को बेहतर मार्गदर्शन दे सकेंगे और डिजिटल शिक्षा की गुणवत्ता बनी रहेगी।
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