
Balod में मितानिन कार्यकर्ताओं का जोरदार प्रदर्शन: तीन सूत्री मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट के सामने धरना
बालोद, 20 अगस्त 2025: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में आज हजारों मितानिन कार्यकर्ताओं ने अपनी तीन सूत्री मांगों को पूरा करने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट के सामने धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर एक विशाल पैदल मार्च निकाला। मितानिन कार्यकर्ताओं का यह प्रदर्शन जिले में स्वास्थ्य सेवाओं और उनके अधिकारों को लेकर बढ़ते असंतोष को दर्शाता है।

मांगों में शामिल हैं ये प्रमुख बिंदु
मितानिन कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को स्पष्ट करते हुए कहा कि वे लंबे समय से बेहतर वेतन, स्थायी रोजगार और कार्यस्थल पर बेहतर सुविधाओं की मांग कर रही हैं। उनकी तीन सूत्री मांगों में शामिल हैं:
वेतन वृद्धि: मितानिन कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनकी मेहनत और समर्पण के बावजूद उन्हें उचित वेतन नहीं मिल रहा है।
स्थायी नौकरी: कार्यकर्ताओं ने मांग की कि उनकी सेवाओं को नियमित किया जाए और उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
बेहतर सुविधाएं: कार्यस्थल पर सुरक्षा उपकरण, प्रशिक्षण और अन्य आवश्यक सुविधाओं की कमी को दूर करने की मांग।
पैदल मार्च और नारेबाजी से गूंजा बालोद
प्रदर्शन के दौरान मितानिन कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट कार्यालय के सामने एकत्र होकर जोरदार नारेबाजी की। उन्होंने “मितानिनों का सम्मान करो, मांगें पूरी करो” और “हक दो, वादे नहीं” जैसे नारे लगाए। इसके बाद, कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालय से कलेक्ट्रेट तक एक पैदल मार्च निकाला, जिसमें सैकड़ों महिलाएं शामिल थीं। मार्च के दौरान उन्होंने अपनी मांगों से संबंधित तख्तियां और बैनर प्रदर्शित किए।
प्रशासन से वार्ता की उम्मीद
मितानिन कार्यकर्ताओं की अगुवाई कर रही यूनियन ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर प्रशासन के साथ शांतिपूर्ण वार्ता के लिए तैयार हैं। यूनियन की नेता राधा साहू ने कहा, “हमारा उद्देश्य सिर्फ अपनी मांगों को मनवाना है। हम स्वास्थ्य सेवाओं का आधार हैं, लेकिन हमारी मेहनत को नजरअंदाज किया जा रहा है।”
कलेक्ट्रेट के अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा। हालांकि, कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगी।
समाज का समर्थन
प्रदर्शन को स्थानीय सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों का भी समर्थन मिला। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मितानिनों की मांगों को जायज बताते हुए सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग की। स्थानीय निवासी प्रकाश सिन्हा ने कहा, “मितानिनें हमारे गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं। उनकी मांगों को अनसुना करना अन्याय है।”
आगामी रणनीति
मितानिन कार्यकर्ताओं ने घोषणा की कि यदि उनकी मांगें एक सप्ताह के भीतर पूरी नहीं हुईं, तो वे पूरे जिले में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन और हड़ताल करेंगी। इस प्रदर्शन ने न केवल बालोद बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में मितानिनों की समस्याओं को चर्चा में ला दिया है।
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