
Dhamtari में NHM कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, जिला अस्पताल की सेवाएं प्रभावित
धमतरी: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। जिला स्तरीय एनएचएम कर्मचारी संघ की अगुवाई में गांधी मैदान में चल रही इस हड़ताल के कारण जिला अस्पताल की कई महत्वपूर्ण सेवाएं ठप हो गई हैं। गर्भवती महिलाओं और बच्चों का टीकाकरण रुक गया है, और पोषण आहार से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। जिले के चारों ब्लॉक के एनएचएम कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल हैं।
वेतन विसंगति के खिलाफ कर्मचारियों का गुस्सा
एनएचएम कर्मचारियों का कहना है कि वर्ष 2005 में मिशन की शुरुआत से ही वे अल्प वेतन पर काम कर रहे हैं। उनकी मुख्य शिकायत वेतन विसंगति को लेकर है। कर्मचारियों ने बताया कि संविदा कर्मचारियों को मात्र 15 हजार रुपए मासिक वेतन मिलता है, जबकि समान काम करने वाले नियमित कर्मचारियों को 50 हजार रुपए तक वेतन दिया जाता है। इस असमानता के खिलाफ कर्मचारी लंबे समय से आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया।

10 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन
हड़ताल के दौरान कर्मचारियों ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों को सरकार के सामने रखा है। उन्होंने मांग की है कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करे और वेतन विसंगति को दूर करे। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने “बड़े बड़े लोगन की बड़ी बड़ी बतिया” गीत गाकर अपनी मांगों को रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया और सरकार की उदासीनता पर नाराजगी जताई। कर्मचारियों का कहना है कि वे नहीं चाहते कि हड़ताल लंबे समय तक चले, लेकिन सरकार की अनदेखी ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया है।
अस्पताल सेवाओं पर असर
हड़ताल के कारण जिला अस्पताल में कई आवश्यक सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की देखभाल और पोषण संबंधी सेवाएं रुकने से आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों ने कहा कि वे जनता को असुविधा नहीं पहुंचाना चाहते, लेकिन अपनी जायज मांगों के लिए यह कदम जरूरी हो गया है।
सरकार से वार्ता की मांग
एनएचएम कर्मचारी संघ ने सरकार से तत्काल वार्ता शुरू करने और उनकी मांगों पर विचार करने की अपील की है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे हड़ताल को और तेज करेंगे। जिला प्रशासन और सरकार की ओर से अभी तक इस मामले में कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
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