
Chhattisgarh के पुलिस इंस्पेक्टर संजय पोटम को तीसरी बार मिलेगा राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार
रायपुर, 14 अगस्त 2025: छत्तीसगढ़ पुलिस के इंस्पेक्टर संजय पोटम को उनकी अदम्य वीरता और समर्पण के लिए तीसरी बार राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। कभी माओवादी संगठन का हिस्सा रहे संजय ने 2013 में हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया था। उनकी यह प्रेरणादायक यात्रा न केवल पुलिस बल के लिए, बल्कि समाज के लिए भी एक मिसाल है।

माओवाद से पुलिस सेवा तक का सफर
संजय पोटम का जीवन एक असाधारण कहानी है। कभी माओवादी संगठन में सक्रिय रहे संजय ने 2013 में अपने जीवन को नई दिशा दी और माओवाद को त्यागकर समाज की सेवा में जुट गए। छत्तीसगढ़ पुलिस में शामिल होने के बाद उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अपनी वीरता और कर्तव्यनिष्ठा से सभी का ध्यान खींचा। उनकी इस यात्रा को देखकर कई युवा प्रेरित हुए हैं, जो हिंसा के रास्ते को छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की सोच रहे हैं।

तीसरी बार वीरता पुरस्कार
संजय पोटम को इससे पहले दो बार राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। यह तीसरा अवसर है जब उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान मिलेगा। नक्सल विरोधी अभियानों में उनकी बहादुरी और रणनीतिक कौशल ने कई बार पुलिस को बड़ी सफलता दिलाई है। उनके इस योगदान ने न केवल छत्तीसगढ़ पुलिस बल का मान बढ़ाया है, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
प्रेरणा का स्रोत
संजय पोटम की कहानी उन लोगों के लिए एक प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों में भी सही रास्ता चुनने का साहस रखते हैं। उनकी मेहनत, लगन और देश के प्रति समर्पण ने उन्हें एक सच्चा नायक बनाया है। छत्तीसगढ़ पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “संजय पोटम का जीवन हमें सिखाता है कि साहस और इच्छाशक्ति से कोई भी अपने अतीत को पीछे छोड़कर समाज के लिए कुछ बेहतर कर सकता है।”
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