
U P के बलरामपुर में सनसनीखेज वारदात: 21 वर्षीय विशेष रूप से सक्षम महिला का अपहरण और कथित बलात्कार
बलरामपुर, 13 अगस्त 2025: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। एक 21 वर्षीय मूक-बधिर और विशेष रूप से सक्षम महिला के साथ अपहरण और कथित सामूहिक बलात्कार की घटना सामने आई है। यह वारदात देहात कोतवाली थाना क्षेत्र के बहादुरपुर पुलिस चौकी से महज 20 मीटर की दूरी पर हुई, जो जिला मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों—जिलाधिकारी (डीएम), पुलिस अधीक्षक (एसपी), और जिला जज के आवासों के बेहद करीब है। इस घटना ने न केवल स्थानीय समुदाय में आक्रोश पैदा किया है, बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सीसीटीवी फुटेज ने खोली सुरक्षा की पोल
घटना का एक 14 सेकंड का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें पीड़िता अपनी जान बचाने के लिए सुनसान सड़क पर भागती हुई दिखाई दे रही है। फुटेज में कुछ बाइक सवार युवक उसका पीछा करते नजर आ रहे हैं। यह वीडियो एसपी आवास के पास लगे कैमरे में कैद हुआ है। हैरानी की बात यह है कि बहादुरपुर पुलिस चौकी के तीन से चार सीसीटीवी कैमरे बंद पाए गए, और रेलवे फाटक का कैमरा भी खराब था। इस सुरक्षा चूक ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े किए हैं। परिजनों ने आरोप लगाया है कि इतने संवेदनशील क्षेत्र में पुलिस की लापरवाही के कारण यह वारदात हुई।

क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, 11 अगस्त 2025 की रात करीब 8 बजे, 21 वर्षीय मूक-बधिर युवती अपनी ननिहाल से अपने घर लौट रही थी, जो डीएम आवास के पास स्थित है। दोनों स्थानों के बीच की दूरी लगभग एक किलोमीटर है। रास्ते में, दो आरोपियों, अंकुर वर्मा और हर्षित पांडे, ने कथित तौर पर उसे जबरन रोका और बहादुरपुर पुलिस चौकी के पीछे झाड़ियों में ले जाकर सामूहिक बलात्कार किया। चूंकि पीड़िता बोलने या सुनने में असमर्थ थी, वह मदद के लिए शोर नहीं मचा सकी। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई, मुठभेड़ में आरोपी गिरफ्तार
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मामले की जांच शुरू की। पीड़िता के भाई की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया, और विशेष पुलिस टीमों का गठन कर आरोपियों की तलाश शुरू की गई। 13 अगस्त की सुबह, पुलिस ने कुकुरभुकवा गांव में छिपे दोनों आरोपियों, अंकुर वर्मा और हर्षित पांडे, को मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर लिया। मुठभेड़ में दोनों आरोपी घायल हो गए, और उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस दौरान एक दारोगा, अमित चौहान, भी गोली लगने से घायल हुए, जिनका इलाज जारी है।
पीड़िता की हालत और परिजनों का आक्रोश
पीड़िता को तुरंत जिला महिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने दुष्कर्म की पुष्टि की। उनकी शारीरिक स्थिति स्थिर बताई जा रही है, लेकिन वह गहरे मानसिक सदमे में है। परिजनों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि इतने संवेदनशील क्षेत्र में, जहां डीएम, एसपी, और जज जैसे बड़े अधिकारियों के आवास हैं, ऐसी घटना का होना पुलिस और प्रशासन की नाकामी को दर्शाता है। उन्होंने दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की है।
विपक्ष ने उठाए सवाल, ऑपरेशन त्रिनेत्र पर संदेह
इस घटना ने उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर ट्वीट कर मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने योगी सरकार की कानून-व्यवस्था पर तंज कसते हुए कहा कि जब इतने सुरक्षित इलाके में ऐसी घटना हो सकती है, तो दूर-दराज के क्षेत्रों का क्या हाल होगा। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश पुलिस के ‘ऑपरेशन त्रिनेत्र’ पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि घटनास्थल के पास कई सीसीटीवी कैमरे बंद पाए गए।
सामाजिक आक्रोश और कानून-व्यवस्था पर बहस
यह घटना न केवल बलरामपुर, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ रही है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने लोगों के गुस्से को और भड़का दिया है। कई यूजर्स ने इसे ‘जंगल राज’ करार देते हुए सरकार से कठोर कदम उठाने की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब जिले के सबसे सुरक्षित इलाके में ऐसी वारदात हो सकती है, तो ग्रामीण और तराई क्षेत्रों की स्थिति कितनी भयावह होगी।
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