
Breaking news : Bilaspur NIA कोर्ट में 2 अगस्त को होगी दो ननों की जमानत याचिका पर सुनवाई
बिलासपुर, 1 अगस्त 2025:
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में मानव तस्करी और धर्मांतरण के आरोप में गिरफ्तार दो ननों, प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस, के मामले ने अब बिलासपुर की एनआईए कोर्ट में नया मोड़ लिया है। दोनों ननों ने 1 अगस्त 2025 को जमानत के लिए याचिका दायर की थी, जिसकी सुनवाई 2 अगस्त 2025 को बिलासपुर एनआईए कोर्ट में होगी। यह मामला स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
मामले का विवरण
25 जुलाई 2025 को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने दो ननों, प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस, के साथ एक युवक, सुकमन मंडावी, को रोक लिया था। आरोप था कि ये तीनों नारायणपुर जिले की तीन युवतियों को बहला-फुसलाकर उत्तर प्रदेश के आगरा ले जा रहे थे, जहां कथित तौर पर उनका धर्मांतरण और मानव तस्करी की योजना थी। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी के बाद तीनों को जीआरपी थाना भिलाई-3 की पुलिस को सौंप दिया था। इसके बाद छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम की धारा 4 के तहत मामला दर्ज किया गया, और सभी को न्यायिक रिमांड पर दुर्ग केंद्रीय जेल भेज दिया गया।

जमानत याचिका पर अब तक की प्रक्रिया
दोनों ननों की जमानत याचिका पहले निचली अदालत और फिर सेशन कोर्ट में खारिज हो चुकी है। सेशन कोर्ट के विशेष न्यायाधीश अनीश दुबे ने स्पष्ट किया कि मानव तस्करी का यह मामला उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता, और इसकी सुनवाई केवल एनआईए कोर्ट में हो सकती है। इसके बाद, पीड़ित पक्ष के वकील ने बिलासपुर एनआईए कोर्ट में जमानत याचिका दायर की, जिसकी सुनवाई अब 2 अगस्त को निर्धारित है।
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस मामले ने सामाजिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ननों की गिरफ्तारी को “बिल्कुल अन्यायपूर्ण” करार दिया है, जिससे इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान मिला है। X पर इस मामले को लेकर कई पोस्ट वायरल हो रहे हैं, जिसमें लोग ननों के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, बजरंग दल और अन्य संगठनों का कहना है कि यह मानव तस्करी और धर्मांतरण का गंभीर मामला है।
NIA कोर्ट में सुनवाई की उम्मीद
बिलासपुर एनआईए कोर्ट में 2 अगस्त को होने वाली सुनवाई में दोनों पक्ष अपने तर्क प्रस्तुत करेंगे। ननों के वकील का दावा है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं, जबकि अभियोजन पक्ष मानव तस्करी और धर्मांतरण के सबूत पेश करने की तैयारी में है। कोर्ट का फैसला इस मामले की दिशा तय करेगा, और यह तय होगा कि ननों को जमानत मिलेगी या उन्हें जेल में ही रहना होगा।
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