
छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड को झटका: Raipur में अरबों की जमीन पर दावा खारिज
कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में वक्फ बोर्ड को बड़ा झटका लगा है। रायपुर की एक बहुमूल्य जमीन, जिसकी कीमत अरबों रुपये आंकी जा रही है, पर वक्फ बोर्ड का दावा कोर्ट ने खारिज कर दिया है। यह जमीन नगर निगम के पक्ष में गई है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि वक्फ बोर्ड इस जमीन पर अपना अधिकार साबित करने में असमर्थ रहा। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि वक्फ ट्रिब्यूनल में तीसरे सदस्य की नियुक्ति 15 दिन के भीतर सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के विवादों का निपटारा तेजी से हो सके।
जमीन विवाद की पृष्ठभूमि

यह विवाद रायपुर के एक प्रमुख इलाके में स्थित जमीन को लेकर था, जिसे वक्फ बोर्ड ने अपनी संपत्ति घोषित किया था। बोर्ड का दावा था कि यह जमीन दान के रूप में प्राप्त हुई थी। हालांकि, नगर निगम ने इसे सरकारी जमीन बताते हुए दस्तावेज पेश किए। कोर्ट ने नगर निगम के दस्तावेजों को प्रामाणिक माना और वक्फ बोर्ड के दावे को आधारहीन करार दिया। इस फैसले से रायपुर में संपत्ति विवादों को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
वक्फ बोर्ड की प्रतिक्रिया
वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने इस फैसले पर निराशा जताई है। उन्होंने कहा कि बोर्ड इस फैसले के खिलाफ अपील करने पर विचार कर रहा है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता इब्राहिम मेमन ने भी इस मामले में बोर्ड के पक्ष का समर्थन किया, लेकिन उनकी बयानबाजी को लेकर कुछ विवाद भी सामने आए हैं।
भविष्य की दिशा
यह फैसला रायपुर में भूमि स्वामित्व और वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन पर नए सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से अन्य शहरों में भी वक्फ बोर्ड के दावों की समीक्षा तेज हो सकती है।
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