अंबिकापुर: दो किशोरियों से देह व्यापार कराने वाले तीन आरोपियों को 14-14 साल की सजा
जिला एवं सत्र न्यायालय, सरगुजा, अंबिकापुर में एक सनसनीखेज मामले में तीन आरोपियों को 14-14 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। दो नाबालिग बहनों और उनके भाई को बहला-फुसलाकर बंधक बनाकर देह व्यापार में धकेलने के इस मामले में कोर्ट ने प्रत्येक आरोपी पर 8 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
क्या है पूरा मामला?
अभियोजन के अनुसार, जशपुर जिले के ग्राम पुराईनबंध निवासी सम्पेत यादव ने 12 अप्रैल 2024 को तपकरा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। सम्पेत ने बताया कि उनके नाती भुनेश्वर की मृत्यु 18 साल की उम्र में हो गई थी, जिसके बाद वह अपने तीन बच्चों—दो बेटियों (14 और 12 साल) और एक बेटे शशिकांत यादव (10 साल)—की देखभाल कर रहे थे। बच्चे उनके बड़े भाई गुदल के घर रहते थे।
बच्चों को बहला-फुसलाकर किया अगवा
12 अप्रैल 2024 को सम्पेत की बहू पुतली बाई ने बताया कि तीनों बच्चे गुदल के घर से गायब हैं। सम्पेत ने आसपास और रिश्तेदारों में पता किया तो गांव के अरविंद यादव, देवनंदन और लोधाराम ने बताया कि बच्चों को टांगरगांव निवासी विमला यादव, जो सम्पेत की भांजी है, स्कूटी पर ले जाते देखा गया था। पहले तो सम्पेत ने सोचा कि बच्चे परिवार के पास गए होंगे, लेकिन जब दो-तीन दिन बाद विमला से पूछताछ की गई तो उसने बच्चों को ले जाने से इनकार कर दिया।

आरोपियों ने बनाया बंधक, कराया देह व्यापार
जांच में पता चला कि विमला यादव (जशपुर), निर्मला नायक और कोमल अहिरवार (छत्तरपुर, मध्यप्रदेश) ने मिलकर बच्चों को बहला-फुसलाकर अंबिकापुर ले गए थे। वहां बच्चों को बंधक बनाकर दो नाबालिग बहनों से जबरन देह व्यापार कराया गया। इस मामले की शिकायत के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई शुरू की और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।
विशेष न्यायालय ने सुनाई सजा
विशेष न्यायाधीश के. एल. चरयाणी की अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने तीनों आरोपियों—विमला यादव, निर्मला नायक और कोमल अहिरवार—को 14-14 साल की सजा और 8 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
तपकरा थाने में दर्ज शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू की। बच्चों को बरामद करने और आरोपियों को पकड़ने के लिए विशेष टीम गठित की गई थी। इस फैसले से पीड़ित परिवार को न्याय मिला है, और समाज में ऐसे अपराधों के खिलाफ कड़ा संदेश गया है।
समाज में दहशत, कड़ी सजा की मांग
इस तरह की घटनाओं ने क्षेत्र में दहशत फैला दी है। स्थानीय लोग और सामाजिक संगठन ऐसी वारदातों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। कोर्ट के इस फैसले को नाबालिगों के खिलाफ अपराधों पर अंकुश लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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