छत्तीसगढ़: 8 खूंखार नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, कमांडर और डॉक्टर शामिल
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर और सुकमा जिलों में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। नारायणपुर में 8 खूंखार नक्सलियों ने पुलिस के सामने हथियार डाल दिए, जबकि सुकमा में 5 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में प्लाटून कमांडर और डॉक्टर जैसे अहम सदस्य शामिल हैं। यह घटना 24 जुलाई 2025 को हुई, जो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे अभियानों की सफलता को दर्शाती है।
नारायणपुर में 8 नक्सलियों का आत्मसमर्पण
नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) रॉबिंसन गुरिया के समक्ष 8 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें 4 पुरुष और 4 महिला नक्सली शामिल हैं, जिन पर सरकार और पुलिस ने कुल 33 लाख रुपये का इनाम रखा था। आत्मसमर्पण करने वालों में प्लाटून 16 का कमांडर कमलेश और डॉक्टर टीम का सुखलाल जैसे प्रमुख नक्सली शामिल हैं। ये नक्सली अबूझमाड़ के जंगलों में लंबे समय से सक्रिय थे और कई बड़ी नक्सली वारदातों में उनकी संलिप्तता थी।
सुकमा में 5 हार्डकोर नक्सलियों ने डाले हथियार
सुकमा जिले में भी 5 हार्डकोर नक्सलियों ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के सामने आत्मसमर्पण किया। ये नक्सली नियद नेल्लानार और पुना मारगेम जैसे पुलिस अभियानों से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने बताया कि सुरक्षाबलों की लगातार कार्रवाई और सरकार की पुनर्वास नीतियों ने उन्हें हथियार छोड़ने के लिए प्रेरित किया।

पुनर्वास नीति के तहत मिलेगी मदद
आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सहायता प्रदान की जा रही है। इस नीति के तहत उन्हें आर्थिक मदद, रोजगार के अवसर और सामाजिक मुख्यधारा में शामिल होने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। पुलिस का कहना है कि यह कदम नक्सलियों को हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
नक्सलवाद के खिलाफ अभियान को मिली मजबूती
नारायणपुर और सुकमा में नक्सलियों का आत्मसमर्पण सुरक्षाबलों और पुलिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान और सरकार की समर्पण नीतियों का असर साफ दिख रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन आत्मसमर्पणों से नक्सल संगठनों की कमर टूटेगी और क्षेत्र में शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी।
सामाजिक बदलाव की ओर कदम
यह घटना नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक बदलाव की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सलियों का आत्मसमर्पण न केवल हिंसा को कम करने में मदद करेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं को भी मुख्यधारा में शामिल होने के लिए प्रेरित करेगा। सरकार और सुरक्षाबल अब नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए और अधिक प्रभावी रणनीतियों पर काम कर रहे हैं।
पुलिस ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि वे नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रोत्साहित करें और शांति स्थापना में सहयोग करें।
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