
कवर्धा में प्रतिबंधित मांगुर मछली की बड़ी खेप पकड़ी गई, 450 किलो मछलियां नष्ट, जानिए क्यों है बैन
कवर्धा, 24 जुलाई 2025:
छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में एक बड़ी कार्रवाई के तहत मत्स्य विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली की 450 किलोग्राम (4.50 क्विंटल) खेप जब्त की है। इन मछलियों को खैरागढ़ से पांडातराई ले जाया जा रहा था, लेकिन सारंगपुर चौबट्टा चौक पर मंगलवार को पिकअप वाहन को रोककर जब्त कर लिया गया। इसके बाद मछलियों को नष्ट करने के लिए बोडला हेचरी में गड्ढा खोदकर उन्हें दफन कर दिया गया।
4.50 लाख रुपये की थी मछलियां
जांच में पता चला कि जब्त की गई मछलियां करीब 4.50 क्विंटल थीं, जिनकी बाजार कीमत लगभग 4.50 लाख रुपये आंकी गई है। यानी एक क्विंटल मछली की कीमत करीब एक लाख रुपये थी। इन मछलियों को बाजार में बेचने की तैयारी थी, लेकिन मत्स्य विभाग को मिली सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पिकअप वाहन को पकड़ लिया गया। मत्स्य विभाग के अधिकारी रामधन सिंह ने बताया कि खैरागढ़ के गंडई से यह प्रतिबंधित मछली कवर्धा में खपाने के लिए लाई जा रही थी।
क्यों है मांगुर मछली पर प्रतिबंध?
थाई मांगुर मछली, जिसे वैज्ञानिक रूप से Clarias gariepinus के नाम से जाना जाता है, भारत में 2000 से प्रतिबंधित है। यह मछली अपनी आक्रामक और मांसाहारी प्रकृति के कारण पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक मानी जाती है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने इसकी खेती, बिक्री और खपत पर रोक लगाई थी, क्योंकि यह देशी मछली प्रजातियों को 70% तक नष्ट कर चुकी है और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचाती है। इसके अलावा, यह मछली कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है, क्योंकि इसे अक्सर सड़े-गले मांस और अशुद्ध परिस्थितियों में पाला जाता है।

मछलियों को नष्ट करने के लिए खोदी ‘कब्र’
जब्ती के बाद मछलियों को नष्ट करने के लिए बोडला स्थित हेचरी में जेसीबी की मदद से एक बड़ा गड्ढा खोदा गया। इस गड्ढे में सभी 450 किलोग्राम मछलियों को डालकर दफन कर दिया गया। इस कार्रवाई को स्थानीय लोग ‘मछलियों की कब्र’ खोदने के रूप में देख रहे हैं। यह कार्रवाई पर्यावरण और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।
संयुक्त टीम की त्वरित कार्रवाई
इस कार्रवाई में मत्स्य विभाग के अधिकारी, नायब तहसीलदार ऋतु श्रीवास और स्थानीय पुलिस की टीम शामिल थी। सूचना मिलते ही टीम ने तुरंत कार्रवाई की और पिकअप वाहन को जब्त कर लिया। वाहन के खिलाफ अब वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। मत्स्य विभाग के अधिकारी रामधन सिंह ने बताया कि इस तरह की अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए विभाग सतर्क है और भविष्य में भी ऐसी कार्रवाइयां जारी रहेंगी।
स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरा
थाई मांगुर मछली न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि यह मछली मछली जूँ (fish lice) जैसे परजीवियों को भी वहन करती है, जो जलीय पर्यावरण में बीमारियों का कारण बन सकती है। यह मछली गंदे पानी और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी जीवित रह सकती है, जिसके कारण इसे सड़े-गले मांस और पालक जैसी चीजों के मिश्रण से पाला जाता है, जो जल प्रदूषण को और बढ़ाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका सेवन करने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
जागरूकता और सख्ती की जरूरत
मत्स्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे थाई मांगुर मछली का सेवन, खेती या बिक्री न करें, क्योंकि यह अवैध और खतरनाक है। साथ ही, आम जनता को सलाह दी गई है कि वे केवल प्रमाणित और स्थानीय मछलियों का ही सेवन करें। इस कार्रवाई से यह संदेश भी गया है कि प्रशासन ऐसी अवैध गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रहा है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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