
कोरबा गेवरा कोल माइंस में हादसा: हेल्पर की दर्दनाक मौत
ड्रिल मशीन से कुचलकर मृत्यु
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित गेवरा कोल माइंस, जो भारत की सबसे बड़ी कोयला खदानों में से एक है, में 22 जुलाई 2025 को दोपहर लगभग 2:30 बजे (आईएसटी) एक दर्दनाक हादसा हुआ। 32 वर्षीय रमेश साहू, जो एक अनुबंधित हेल्पर के रूप में कार्यरत थे, एक भारी-भरकम ड्रिल मशीन के संचालन में सहायता कर रहे थे, तभी यह हादसा हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मशीन में अचानक खराबी आई, जिसके कारण रमेश इसके तंत्र में फंस गए। सहकर्मियों ने मशीन को रोकने की कोशिश की, लेकिन चिकित्सा सहायता मिलने से पहले ही रमेश ने दम तोड़ दिया। इस घटना ने खदान के श्रमिक समुदाय में दहशत फैला दी है और खदान में कार्यरत कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
जांच शुरू

हादसे की सूचना मिलते ही कोरबा पुलिस और साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल), जो गेवरा कोल माइंस का प्रबंधन करती है, ने तुरंत जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि मशीन के संचालन में लापरवाही और रखरखाव की कमी इस हादसे के प्रमुख कारण हो सकते हैं। जांच दल मशीन के रखरखाव रिकॉर्ड की समीक्षा कर रहा है और अन्य श्रमिकों से पूछताछ कर रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था। मृतक के परिवार ने खदान प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए ₹50 लाख के मुआवजे और परिवार के एक सदस्य के लिए सरकारी नौकरी की मांग की है। प्रशासन ने पारदर्शी जांच का आश्वासन दिया है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का वादा किया है।
सुरक्षा मानकों की चिंता
गेवरा कोल माइंस में पिछले तीन वर्षों में कम से कम पांच हादसे दर्ज किए गए हैं, जिनमें से दो घातक थे। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने उपकरण, अनुबंधित श्रमिकों के लिए अपर्याप्त प्रशिक्षण, और सुरक्षा नियमों का ढीला पालन खनन क्षेत्र में बार-बार होने वाली समस्याएं हैं। इस हादसे में शामिल ड्रिल मशीन कथित तौर पर एक दशक से अधिक पुरानी थी, जिसने उपकरणों के रखरखाव की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। जिला प्रशासन ने खदान में सभी मशीनों की सुरक्षा ऑडिट का आदेश दिया है और जांच पूरी होने तक इसी तरह की ड्रिल मशीनों के संचालन पर रोक लगा दी है। श्रमिक यूनियनों ने तत्काल सुधारों की मांग की है, जिसमें नियमित सुरक्षा ड्रिल और उपकरणों का आधुनिकीकरण शामिल है।
भविष्य में हादसों को रोकने के उपाय
ऐसे हादसों को रोकने के लिए विशेषज्ञों और यूनियन नेताओं ने कई सुझाव दिए हैं। सभी श्रमिकों, विशेष रूप से अनुबंधित कर्मचारियों के लिए अनिवार्य सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू करना आवश्यक है, क्योंकि इन कर्मचारियों को अक्सर औपचारिक प्रशिक्षण नहीं मिलता। मशीनों का नियमित तृतीय-पक्ष ऑडिट और रखरखाव का सख्त अनुसूची भी महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, भारी मशीनों पर उन्नत सेंसर-आधारित सुरक्षा प्रणालियों को स्थापित करने से संचालन में गड़बड़ी का पता लगाने और हादसों को रोकने में मदद मिल सकती है। प्रशासन से खान सुरक्षा अधिनियम, 1952 का कड़ाई से पालन करने और उल्लंघन के लिए कठोर दंड लागू करने का आग्रह किया गया है। एक टास्क फोर्स का गठन करने का प्रस्ताव है, जिसमें सरकारी अधिकारी, एसईसीएल प्रतिनिधि, और श्रमिक यूनियन शामिल हों, ताकि सुरक्षा अनुपालन की निगरानी की जा सके और शिकायतों का तुरंत समाधान किया जा सके।
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