
88 वर्षीय रिटायर्ड DIG की स्वच्छता मुहिम, आनंद महिंद्रा ने की तारीफ
चंडीगढ़: उम्र महज एक संख्या है, यह बात पंजाब पुलिस के रिटायर्ड डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) इंदरजीत सिंह सिद्धू ने अपने कार्यों से साबित कर दिखाया है। 88 साल की उम्र में भी वह हर सुबह चंडीगढ़ की सड़कों को स्वच्छ बनाने के लिए निकल पड़ते हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण में चंडीगढ़ की कम रैंकिंग से नाखुश सिद्धू ने शिकायत करने के बजाय खुद ही सफाई का बीड़ा उठाया। उनके इस समर्पण की तारीफ उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने भी की, जिन्होंने सोशल मीडिया पर उनका वीडियो शेयर कर उन्हें “सड़कों का शांत योद्धा” बताया।
सुबह 6 बजे शुरू होता है स्वच्छता का मिशन
हर सुबह 6 बजे, जब शहर अभी नींद में होता है, इंदरजीत सिंह सिद्धू सेक्टर 49 की सड़कों पर एक साइकिल ठेले के साथ निकल पड़ते हैं। बिना किसी दिखावे के वह सड़क किनारे बिखरे कचरे को इकट्ठा करते हैं। उनकी यह दिनचर्या न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि स्वच्छ भारत अभियान के मूल संदेश को भी मजबूत करती है। सिद्धू का कहना है, “मुझे साफ-सुथरा माहौल पसंद है, इसलिए मैं सफाई करता हूं। अगर हम सभी मिलकर प्रयास करें, तो चंडीगढ़ स्वच्छता में नंबर एक बन सकता है।”

स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग से शुरू हुई पहल
चंडीगढ़, जिसे ‘सिटी ब्यूटीफुल’ के नाम से जाना जाता है, ने स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में दूसरा स्थान हासिल किया। हालांकि, सिद्धू इस रैंकिंग से संतुष्ट नहीं थे। उनका मानना है कि चंडीगढ़ को स्वच्छता में शीर्ष पर होना चाहिए। उन्होंने कहा, “विदेशों में सड़कें इतनी साफ होती हैं कि जमीन चमकती है। भारत में ऐसा क्यों नहीं हो सकता?” अपनी इस सोच को हकीकत में बदलने के लिए सिद्धू ने खुद सड़कों पर उतरकर सफाई शुरू की।

आनंद महिंद्रा ने की ‘शांत योद्धा’ की तारीफ
सिद्धू के इस नेक कार्य का वीडियो जब उद्योगपति आनंद महिंद्रा तक पहुंचा, तो उन्होंने इसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किया। उन्होंने लिखा, “हर सुबह 6 बजे, चंडीगढ़ के सेक्टर 49 की शांत सड़कों पर यह 88 वर्षीय रिटायर्ड पुलिस अधिकारी अपनी सेवा शुरू करते हैं। केवल एक साइकिल ठेले और कर्तव्य की भावना के साथ वह कचरा उठाते हैं। यह सिर्फ कचरा हटाना नहीं, बल्कि बेहतर दुनिया में विश्वास का प्रतीक है।” महिंद्रा ने सिद्धू को ‘शांत योद्धा’ कहकर सम्मानित किया और कहा कि “सेवा की कोई उम्र नहीं होती।”
प्रेरणा बन रही सिद्धू की मेहनत
इंदरजीत सिंह सिद्धू की यह पहल अब धीरे-धीरे एक सामुदायिक आंदोलन का रूप ले रही है। शुरुआत में कुछ लोगों ने उनकी इस कोशिश को ‘पागलपन’ करार दिया था, लेकिन उनकी निरंतरता और निस्वार्थ भावना ने सबका दिल जीत लिया। आज उनके परिवार और पड़ोसी भी उनके इस मिशन में सहयोग कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग उनकी तारीफ में कसीदे पढ़ रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “यह सच्ची देशभक्ति है। बिना किसी पद या पहचान के समाज के लिए कुछ करना ही असली सेवा है।”

निजी जीवन में दुख, फिर भी सेवा में डटे
सिद्धू का निजी जीवन भी उनकी प्रेरणादायक कहानी का हिस्सा है। 2023 में उनकी पत्नी दविंदर पाल कौर का निधन हो गया। उनका बेटा अमेरिका में रहता है और बेटी मोहाली में। अकेलेपन को पीछे छोड़ते हुए सिद्धू ने अपनी ऊर्जा को स्वच्छता के इस मिशन में लगाया। वह कहते हैं, “मैं जब तक सक्षम हूं, तब तक यह काम करता रहूंगा।” उनकी यह प्रतिबद्धता न केवल चंडीगढ़, बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल है।
स्वच्छ भारत का सच्चा सिपाही.
इंदरजीत सिंह सिद्धू का यह कार्य स्वच्छ भारत अभियान को साकार करने का जीवंत उदाहरण है। उनकी मेहनत न केवल चंडीगढ़ की सड़कों को स्वच्छ बना रही है, बल्कि लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर रही है कि स्वच्छता केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। सिद्धू की यह कहानी हमें सिखाती है कि उम्र, परिस्थितियां या संसाधनों की कमी कभी भी नेक काम में बाधा नहीं बन सकती।
इस प्रेरणादायक कहानी ने न केवल चंडीगढ़, बल्कि पूरे देश में लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने का काम किया है। सिद्धू जैसे नायक हमें याद दिलाते हैं कि बदलाव की शुरुआत हमेशा अपने घर और अपनी गली से होती है।
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