
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा: स्वास्थ्य कारणों से लिया निर्णय
22 जुलाई , 25
स्वास्थ्य समस्याओं का सामना
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने हाल ही में कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना किया। मार्च 2025 में, उन्हें सीने में दर्द और बेचैनी की शिकायत के बाद दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में भर्ती कराया गया था। चार दिन तक गहन चिकित्सा इकाई में निगरानी के बाद उन्हें छुट्टी दी गई थी। इसके अलावा, जून में उत्तराखंड के नैनीताल में कुमाऊं विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती समारोह के दौरान वह अचानक बेहोश हो गए थे।
दिल्ली में घटना

17 जुलाई को, धनखड़ दिल्ली में अपनी पत्नी और दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना के साथ एक उद्यान के दौरे पर थे, जब उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। सूत्रों के अनुसार, वह बेहोश हो गए और उन्हें तुरंत सहायता प्रदान की गई। उनकी पत्नी ने उन्हें पानी पिलाया, जिसके बाद वह कुछ समय में ठीक हो गए। हाल ही में उनकी एंजियोप्लास्टी भी हुई थी, जिससे उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं।
इस्तीफे की घोषणा
21 जुलाई 2025 को, संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, धनखड़ ने अचानक उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे अपने पत्र में कहा, “स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने के लिए, मैं इसके द्वारा भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देता हूं।” यह निर्णय राजनीतिक हलकों में आश्चर्यजनक रहा, क्योंकि वह उस दिन पहले राज्या सभा की कार्यवाही का संचालन कर रहे थे।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
धनखड़ के इस्तीफे ने विपक्षी दलों, विशेष रूप से कांग्रेस, में कई सवाल खड़े किए। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि इस्तीफे के पीछे स्वास्थ्य कारणों से “कहीं गहरे” कारण हो सकते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से धनखड़ को उनका निर्णय वापस लेने के लिए मनाने का आग्रह किया। अन्य नेताओं, जैसे कपिल सिब्बल और आनंद दुबे, ने उनके स्वास्थ्य के लिए शुभकामनाएं दीं, लेकिन इस्तीफे की समयबद्धता पर सवाल उठाए।
भविष्य की संभावनाएं
धनखड़ के इस्तीफे के बाद, नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की उम्मीद है। संविधान के अनुच्छेद 68 के अनुसार, उपराष्ट्रपति के पद में रिक्ति को जल्द से जल्द भरा जाना चाहिए। धनखड़, जो अगस्त 2022 से पद पर थे, ने अपने कार्यकाल के दौरान राज्या सभा के अध्यक्ष के रूप में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। उनके इस्तीफे ने राजनीतिक और संसदीय गतिशीलता पर चर्चा को तेज कर दिया है।
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