
दिल्ली पुलिस ने फर्जी लॉटरी घोटाले के सात ठगों को किया गिरफ्तार
20 जुलाई, 2025
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़े ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो पूरे देश में फर्जी लॉटरी और पुरस्कार योजनाओं के जरिए लोगों को ठग रहा था। रविवार को पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमें पांच भारतीय और दो नाइजीरियाई नागरिक शामिल हैं। डीसीपी (क्राइम ब्रांच) विक्रम सिंह के अनुसार, यह गिरोह फेसबुक और मैसेंजर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर महिलाओं या विदेशी व्यापारियों के रूप में लोगों का विश्वास जीतकर ठगी करता था।
गिरोह का कार्यप्रणाली
इस गिरोह का तरीका बेहद सुनियोजित था। नाइजीरियाई नागरिक फर्जी लॉटरी जीत या कीमती पार्सल के वादे के साथ लोगों को लुभाते थे, जबकि भारतीय सहयोगी फर्जी आधार कार्ड और सिम कार्ड का उपयोग कर नकली बैंक खाते बनाते थे। ठगी से प्राप्त धन को या तो नकद निकाला जाता था या फोनपे जैसे यूपीआई ऐप के माध्यम से डिजिटल रूप से स्थानांतरित किया जाता था। शाहिद रजा और उनके दामाद शाहरुख खान नकद निकासी और डिजिटल लेनदेन को संभालते थे, जबकि विकास और उनके भाई राकेश ने 18-20 फर्जी बैंक खाते बनाए।
गिरफ्तारी और बरामदगी
पुलिस को 7 जुलाई को मिली गुप्त सूचना के आधार पर पंजाबी बाग से शाहिद रजा को 3.63 लाख रुपये नकद, नौ एटीएम कार्ड और आपत्तिजनक डेटा वाले मोबाइल फोन के साथ गिरफ्तार किया गया। उनकी पूछताछ से खानपुर में नाइजीरियाई नागरिक शेड्रैक ओनैनोर उर्फ हैप्पी को पकड़ा गया, जो 2018 से अवैध रूप से भारत में रह रहा था। इसके बाद चार अन्य आरोपियों—संडे जॉन उर्फ लिबर्टी, विकास, शाहरुख खान और राकेश उर्फ लालू को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने कई मोबाइल फोन, आधार और पैन कार्ड, चेकबुक और बैंक पासबुक बरामद किए।
नाइजीरियाई नागरिकों की भूमिका
गिरफ्तार नाइजीरियाई नागरिकों में संडे जॉन 2023 में बिजनेस वीजा पर भारत आए थे, जो 2024 में समाप्त हो गया था। दूसरा नाइजीरियाई नागरिक 2013 में मेडिकल वीजा पर आया था, जिसका वीजा भी समाप्त हो चुका था। दोनों अवैध रूप से भारत में रह रहे थे और इस ठगी रैकेट के मुख्य संचालक थे। वे फर्जी खातों के जरिए लोगों से विश्वास बनाकर पैसे ऐंठते थे और फिर खातों को निष्क्रिय कर देते थे।
कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच
आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (बीएनएस) और विदेशी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह एक साल से अधिक समय से सक्रिय था और अब तक 20-25 पीड़ितों का पता लगाया जा चुका है। जांच अभी जारी है और पुलिस को और गिरफ्तारियों की उम्मीद है। लोगों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध योजना में पैसा जमा करने से पहले सत्यापन करने की अपील की गई है।
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