
Gwalior: TI मंगल सिंह पपोला सस्पेंड, 16 साल पुराने फर्जी एनकाउंटर मामले में CBI का एक्शन
20 जुलाई 2025
नीमच में 16 साल पहले हुआ था फर्जी एनकाउंटर
मध्य प्रदेश के नीमच जिले में 2009 में हुए एक कथित एनकाउंटर ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। इस मामले में ग्वालियर के झांसी रोड थाने के थाना प्रभारी (टीआई) मंगल सिंह पपोला पर गंभीर आरोप लगे हैं। जांच में यह पाया गया कि 16 साल पहले नीमच में बंशी गुर्जर नामक व्यक्ति के साथ हुआ एनकाउंटर फर्जी था। सीबीआई की जांच के अनुसार, बंशी गुर्जर को 2009 में मृत घोषित किया गया था, लेकिन वह 2012 में जिंदा पकड़ा गया, जिसने इस एनकाउंटर की सत्यता पर सवाल खड़े किए।

सीबीआई ने जारी किया वारंट, पपोला फरार
इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने टीआई मंगल सिंह पपोला के खिलाफ वारंट जारी किया है। जब सीबीआई का हवलदार वारंट लेकर ग्वालियर के झांसी रोड थाने पहुंचा, तब पपोला वहां मौजूद नहीं थे। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने आकस्मिक अवकाश लिया और उसके बाद से उनका मोबाइल बंद है। पपोला के अचानक गायब होने से यह माना जा रहा है कि वह भूमिगत हो गए हैं।
पुलिस प्रशासन ने लिया सख्त कदम
इस गंभीर मामले को देखते हुए ग्वालियर पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मंगल सिंह पपोला को निलंबित कर दिया है। पुलिस विभाग में इस घटना ने हड़कंप मचा दिया है, और अधिकारियों ने इस मामले में पारदर्शिता बरतने का आश्वासन दिया है। पपोला के निलंबन की खबर ने स्थानीय लोगों में भी चर्चा का माहौल बना दिया है।
कोर्ट और सीबीआई की कार्रवाई जारी
नीमच फर्जी एनकाउंटर मामले में सीबीआई पहले ही दो अन्य अधिकारियों, डीएसपी ग्लैडविन एडवर्ड कार और प्रधान आरक्षक नीरज प्रधान को गिरफ्तार कर चुकी है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर इस मामले की गहन जांच चल रही है। कोर्ट ने इस मामले में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सीबीआई की यह कार्रवाई फर्जी एनकाउंटर के मामलों में पुलिस की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
भविष्य में पारदर्शिता की उम्मीद
इस घटना ने एक बार फिर पुलिस एनकाउंटरों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। नीमच के इस 16 साल पुराने मामले ने न केवल पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दर्शाया है कि जांच एजेंसियां पुराने मामलों को भी गंभीरता से ले रही हैं। जनता और मानवाधिकार संगठनों ने इस कार्रवाई का स्वागत किया है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए और सख्त कदम उठाने की मांग की है।
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