
IIT-Kharagpur में छात्र की आत्महत्या, परिवार ने ‘Ragging’ को ठहराया जिम्मेदार
खड़गपुर के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में 18 जुलाई 2025 को एक दुखद घटना सामने आई, जब चौथे वर्ष के मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र रितम मंडल (21 वर्ष) को उनके हॉस्टल के कमरे में फंदे से लटका पाया गया। रितम, जो कोलकाता के निवासी थे, राजेंद्र प्रसाद हॉल के कमरे नंबर 203 में रहते थे। सुबह करीब 11:30 बजे उनके दोस्तों ने दरवाजा खटखटाया, लेकिन कोई जवाब न मिलने पर हॉस्टल प्रबंधन और पुलिस को सूचित किया गया। पुलिस ने दरवाजा तोड़कर रितम को फंदे से लटके पाया और उन्हें तुरंत बी.सी. रॉय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
परिवार का आरोप

रितम मंडल के परिवार ने दावा किया है कि उनके बेटे की आत्महत्या का कारण आईआईटी परिसर में रैगिंग था। परिवार का कहना है कि रितम को सीनियर छात्रों द्वारा मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था, जिसके कारण वह इस चरम कदम तक पहुंचा। हालांकि, आईआईटी खड़गपुर के अधिकारियों ने अभी तक रैगिंग के आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। परिवार ने पुलिस और संस्थान से इस मामले की गहन जांच की मांग की है ताकि सच्चाई सामने आ सके।
पुलिस और संस्थान की प्रतिक्रिया
हिजली पुलिस आउटपोस्ट ने इस मामले को अप्राकृतिक मृत्यु के रूप में दर्ज किया है और जांच शुरू कर दी है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह आत्महत्या का मामला प्रतीत होता है, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की प्रतीक्षा की जा रही है। आईआईटी खड़गपुर ने एक बयान जारी कर रितम की मृत्यु पर गहरा दुख व्यक्त किया और कहा कि संस्थान ने इस घटना की जांच के लिए एक तथ्य-खोज समिति गठित की है। संस्थान ने यह भी बताया कि रितम की मृत्यु से पहले उनके व्यवहार में कोई असामान्यता नहीं देखी गई थी और वह हाल ही में ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद परिसर में लौटे थे।
परिसर में बढ़ती आत्महत्या की घटनाएं
यह घटना आईआईटी खड़गपुर में पिछले सात महीनों में चौथी अप्राकृतिक मृत्यु है, जिसने परिसर में मानसिक स्वास्थ्य और रैगिंग के मुद्दों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इससे पहले, 20 अप्रैल 2025 को ओशन इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष के छात्र अनिकेत वाल्कर, 4 मई 2025 को सिविल इंजीनियरिंग के तृतीय वर्ष के छात्र मोहम्मद आसिफ कमर, और जनवरी 2025 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के छात्र शॉन मलिक की आत्महत्या की घटनाएं सामने आई थीं। इसके अलावा, 2022 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र फैजान अहमद की मृत्यु को शुरू में आत्महत्या माना गया था, लेकिन बाद में दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि हुई थी।
रैगिंग का इतिहास और कोर्ट की कार्रवाई
आईआईटी खड़गपुर में रैगिंग से संबंधित घटनाएं पहले भी चर्चा में रही हैं। 2022 में फैजान अहमद की मृत्यु के बाद, उनके परिवार ने रैगिंग का आरोप लगाया था, जिसके बाद कलकत्ता हाई कोर्ट ने इसे “रैगिंग का स्पष्ट मामला” करार देते हुए संस्थान के निदेशक को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया था कि रैगिंग में शामिल छात्रों के नाम उजागर किए जाएं। फैजान के मामले में दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गोली और चाकू के घाव पाए गए थे, जिसके बाद विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था।
संस्थान के मानसिक स्वास्थ्य उपाय
आईआईटी खड़गपुर ने दावा किया है कि वह छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए 24×7 काउंसलिंग सेवाएं प्रदान करता है। हाल ही में, प्रत्येक हॉस्टल के कमरे के दरवाजे पर बारकोड लगाए गए हैं, जिन्हें स्कैन कर छात्र तत्काल काउंसलिंग सहायता प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, संस्थान 25 जुलाई 2025 को ‘सेतु’ नामक एक नई एआई-आधारित मानसिक स्वास्थ्य पहल शुरू करने जा रहा है। हालांकि, बार-बार होने वाली ऐसी घटनाओं ने इन उपायों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं।
भविष्य के लिए चिंताएं
आईआईटी खड़गपुर में लगातार हो रही छात्रों की आत्महत्याओं ने न केवल संस्थान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि देश भर के आईआईटी में मानसिक स्वास्थ्य और रैगिंग जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा की आवश्यकता को रेखांकित किया है। 2005 से 2024 के बीच देश के विभिन्न आईआईटी में 127 आत्महत्याएं दर्ज की गई हैं, जिनमें खड़गपुर में 14 मामले शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शैक्षणिक दबाव, सामाजिक अलगाव, और रैगिंग जैसे कारक इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
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