
मध्य प्रदेश टाइगर फोर्स ने तस्करी गिरोह का किया भंडाफोड़: बेबी घड़ियाल और कछुओं की तस्करी को रोका
तस्करी रैकेट पर कार्रवाई
मध्य प्रदेश की स्पेशल टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) ने एक अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 30 बेबी घड़ियाल और 14 रेड-क्राउन्ड रूफ्ड कछुओं को बचाया, जो बांग्लादेश की ओर तस्करी के लिए ले जाए जा रहे थे। यह ऑपरेशन जौरा के पास सबलगढ़-मुरैना रोड पर किया गया, जहां एक वाहन को रोका गया।
तीन गिरफ्तार, और छापेमारी
ऑपरेशन के दौरान, पुलिस ने तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया: राजू आदिवासी (मौरानीपुर, उत्तर प्रदेश), विजय गौर (ग्वालियर), और रामवीर सिंह (ग्वालियर)। इनके पास से वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित प्रजातियां बरामद की गईं। ग्वालियर में बाद में की गई छापेमारी में 3 और रेड-क्राउन्ड रूफ्ड कछुए और 19 थ्री-स्ट्राइप्ड रूफ्ड कछुए बरामद किए गए।
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य से चोरी
बचाए गए जीव राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य से चुराए गए थे, जो भारत में घड़ियाल और कछुओं की संरक्षित प्रजातियों का प्रमुख आवास है। ये लुप्तप्राय प्रजातियां, जो IUCN रेड लिस्ट में गंभीर रूप से संकटग्रस्त हैं, विदेशी पालतू व्यापार और पारंपरिक दवाओं के लिए काले बाजार में बेची जाने वाली थीं।
अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क
एसटीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी रितेश सिरोठिया ने बताया कि यह तस्करी एक संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा थी, जो भारत की लुप्तप्राय प्रजातियों का शोषण कर दक्षिण-पूर्व एशिया के काले बाजारों में आपूर्ति करता है। यदि ये जीव सीमा पार कर जाते, तो वे वैश्विक काले बाजारों में गायब हो जाते।
कानूनी कार्रवाई और जांच
गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। उनके मोबाइल उपकरणों और संचार लॉग की फोरेंसिक जांच चल रही है, जिससे इस नेटवर्क में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है। मध्य प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) के मार्गदर्शन में यह ऑपरेशन महीनों की निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर किया गया।
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